हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक खर्चों में भारी कटौती करते हुए राज्य के मंत्रियों और सभी सरकारी कर्मचारियों के विदेशी दौरों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मंडराते तेल संकट (ऊर्जा संकट) की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि देशव्यापी ईंधन और विदेशी मुद्रा संरक्षण अभियान को भी बल मिलेगा।
जापान उड़ान भरने वाले थे मंत्री गोयल, मुख्यमंत्री की 'नो' के बाद थमे कदम
सरकार की इस सख्ती की सबसे पहली गाज हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के दौरे पर गिरी है। मंत्री विपुल गोयल को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के सिलसिले में 19 से 22 जून तक जापान के दौरे पर जाना था। सरकार के नए फैसले के बाद उनका यह दौरा आधिकारिक रूप से रद्द (टल) कर दिया गया है, जिसकी पुष्टि खुद मंत्री ने की है। अधिकारियों को भी नहीं मिली मंजूरी: सिर्फ मंत्री ही नहीं, बल्कि CMO)के एक को-ऑर्डिनेटर ने भी इसी महोत्सव के सिलसिले में जापान यात्रा के लिए सीएम से अनुमति मांगी थी, जिसे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ तौर पर खारिज कर दिया।
सिर्फ सरकारी पैसा ही नहीं, निजी खर्च पर भी विदेश यात्रा की अनुमति पर 'होल्ड'
हरियाणा सरकार विदेश यात्राओं को लेकर इस कदर सतर्क रुख अपना रही है कि कर्मचारियों के निजी खर्च पर जाने वाले दौरों को भी रोका जा रहा है। श्रम एवं ऊर्जा मंत्री अनिल विज के बिजली विभाग में कुछ कर्मचारियों ने अपने निजी खर्च पर विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। प्रशासनिक सतर्कता और सरकारी रुख को देखते हुए विभागीय स्तर पर उनकी इस निजी यात्रा की अनुमति को भी फिलहाल रोक दिया गया है।
सरकार बना रही है नई और सख्त गाइडलाइन
हालांकि सरकार की विस्तृत गाइडलाइन अभी आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। नई गाइडलाइन में निम्नलिखित कड़े नियम शामिल हो सकते हैं :
CM स्तर की मंजूरी अनिवार्य : किसी भी विशेष परिस्थिति में विदेश यात्रा के लिए सीधे मुख्यमंत्री स्तर से ही मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
अत्यावश्यक कार्यों में ही छूट : केवल देश की सुरक्षा या बेहद आवश्यक रणनीतिक/प्रशासनिक कार्यों के लिए ही विदेश जाने की अनुमति मिल सकेगी।
अनावश्यक प्रतिनिधिमंडलों पर पूर्ण रोक : अध्ययन दौरों या त्योहारों के नाम पर जाने वाले बड़े प्रतिनिधिमंडलों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।
वर्चुअल बैठकों पर जोर : अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैठकों या विचार-विमर्श के लिए अब भौतिक यात्रा के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल प्लेटफॉर्म) का उपयोग किया जाएगा।
ईंधन बचाने के लिए वीआईपी कल्चर और काफिलों में कटौती
यह पाबंदी केवल विदेशी दौरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशव्यापी ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील के बाद हरियाणा के आंतरिक खर्चों पर भी लगाम कसी जा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने सरकारी सुरक्षा काफिले की गाड़ियों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की कमी कर दी है। फिजूलखर्ची रोकने और जनता में एक प्रशासनिक अनुशासन का संदेश देने के लिए हरियाणा के कई मंत्री हफ्ते में एक दिन साइकिल से या पैदल अपने दफ्तर (सचिवालय) पहुंच रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में हरियाणा सरकार का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। यह कदम दो स्पष्ट प्रशासनिक संदेश देता है-पहला, सरकार शीर्ष नेतृत्व से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक वित्तीय अनुशासन का नियम समान रूप से लागू कर रही है। दूसरा, छोटे-छोटे खर्चों और तेल की खपत को नियंत्रित कर राजकोष पर पड़ने वाले बोझ को समय रहते कम किया जा रहा है।
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