आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, बेंगलुरु में आयोजित भव्य ‘प्रज्ञा योग महोत्सव’ में देशभर से आए 11,000 से अधिक बच्चे और अभिभावक शामिल हुए। इस ऐतिहासिक आयोजन में हरियाणा से भी 100 बच्चों ने भाग लेकर राज्य का प्रतिनिधित्व किया। हरियाणा स्टेट मीडिया कोऑर्डिनेटर कुसुम धीमान ने बताया कि बच्चों में अंतःप्रज्ञा, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने आंखों पर पट्टी बांधकर पढ़ना, रंग पहचानना, स्मरण शक्ति आधारित गतिविधियां, ब्लाइंडफोल्ड गेम्स तथा साइकिल चलाने जैसी आश्चर्यजनक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को चकित कर दिया।
मानव चेतना और ‘परम बुद्धिमत्ता’ को विकसित करना अत्यंत आवश्यक
हरियाणा की प्रसिद्ध मुक्केबाज़ एवं पांच बार की राष्ट्रीय चैम्पियन नुपुर श्योराण भी इस आयोजन में उपस्थित रहीं। बच्चों की क्षमताओं को देखकर उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ी अपनी अंतःप्रज्ञा को विकसित कर लें तो खेल में प्रतिद्वंद्वी की अगली चाल का पूर्वाभास भी संभव हो सकता है। इस अवसर पर वैश्विक आध्यात्मिक गुरु गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने बच्चों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में मानव चेतना और ‘परम बुद्धिमत्ता’ को विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे तनाव मुक्त, प्रसन्न और केंद्रित होते हैं, तब उनकी अंतर्निहित क्षमताएं स्वतः जागृत होने लगती हैं।
बच्चों और अभिभावकों ने इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायी बताया
कुसुम धीमान ने बताया कि हरियाणा के विभिन्न जिलों से आए बच्चों और अभिभावकों ने इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि पानीपत के मॉडल टाउन एवं अंसल क्षेत्र में भी समय-समय पर आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा इंट्यूशन प्रोसेस एवं प्रज्ञा योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे भाग लेकर लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज के समय में जब बच्चों में तनाव, मोबाइल और डिजिटल विचलन तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन, स्मरण शक्ति और रचनात्मकता को विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
देशभर से अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं कलाकार उपस्थित रहे
यह आयोजन आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की 45वीं वर्षगांठ समारोह का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा, जिसमें देशभर से अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में हजारों बच्चों द्वारा आंखों पर पट्टी बांधकर विभिन्न गतिविधियों का आत्मविश्वास से प्रदर्शन मानव चेतना और अंतःप्रज्ञा की अद्भुत संभावनाओं का प्रतीक बन गया।
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