हरियाणा के नूंह जिले में गुरुवार देर शाम आए भीषण आंधी-तूफान और खराब मौसम ने भारी तबाही मचाई है। कुदरत के इस कहर के कारण जिले में दो अलग-अलग दर्दनाक हादसे हुए, जिनमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस भयावह घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
टपकन गांव में पहला बड़ा हादसा, क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर गिरी दीवार
मिली जानकारी के अनुसार, पहला और सबसे दर्दनाक हादसा नूंह के गांव टपकन में हुआ। गुरुवार शाम को गांव के सरकारी स्कूल के मैदान में चार बच्चे रोजाना की तरह क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक मौसम का मिजाज बदला और आसमान में काले बादल छाने के साथ ही धूलभरी तेज आंधी और तूफान शुरू हो गया।आंधी-तूफान से खुद को बचाने और छिपने के लिए चारों बच्चे दौड़कर सरकारी स्कूल की बाउंड्री वॉल (दीवार) की ओट में जाकर बैठ गए। लेकिन बदकिस्मती से वह दीवार पहले से ही बेहद जर्जर हालत में थी। तेज हवा के थपेड़ों को बर्दाश्त न कर पाने के कारण वह जर्जर दीवार अचानक भरभराकर बच्चों के ऊपर गिर गई। चारों बच्चे मलबे के नीचे बुरी तरह दब गए।
13 वर्षीय सूफियान की मौके पर मौत, तीन गंभीर
दीवार गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर आस-पास के ग्रामीण तुरंत स्कूल की तरफ दौड़े और भारी मशक्कत के बाद मलबे को हटाकर बच्चों को बाहर निकाला। सूफियान (13 वर्ष), पुत्र अजरूद्दीन (निवासी गोलपुरी, जिला नूंह) को जब तक मलबे से निकाला गया, तब तक उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुका थी। आशिक (12 वर्ष), पुत्र मुबारिक (निवासी टपकन) गंभीर रूप से घायल है। कामिल (9 वर्ष), पुत्र खुर्शीद (निवासी टपकन) की हालत नाजुक बनी हुई है। वशीम (10 वर्ष), पुत्र सिराजुद्दीन (निवासी टपकन) भी इस हादसे में बुरी तरह जख्मी हुआ है। सभी घायल बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें शहीद हसन खान मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, घायल बच्चों की हालत अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है और वे आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
दूसरे हादसे में गिरी आंगन की दीवार, छाया सन्नाटा
इसी तूफान के दौरान जिले में एक और स्थान पर आंगन की दीवार गिरने की घटना सामने आई है, जिसमें एक और बच्चे की जान चली गई। एक ही शाम को हुए इन दो हादसों ने पूरे नूंह जिले को झकझोर कर रख दिया है।
प्रशासन और जर्जर व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की बाउंड्री वॉल लंबे समय से जर्जर थी, जिसकी मरम्मत के लिए कई बार ध्यान दिलाया गया था। यदि समय रहते इस जर्जर दीवार को ठीक करा दिया जाता या गिरा दिया जाता, तो आज एक मासूम की जान न जाती और तीन बच्चे अस्पताल के बेड पर न होते। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई हैं।
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