द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने एवं गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के 70वें अवतरण वर्ष के उपलक्ष्य में बेंगलुरु स्थित द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित भव्य समारोह में भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने युवा विकास, उद्यमिता, शिक्षा, चेतना अध्ययन एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया तथा संस्था के 45 वर्षों की सेवा यात्रा को समर्पित स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया।
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के योगदान की सराहना
राज्य मीडिया कोऑर्डिनेटर कुसुम धीमान ने बताया कि इस अवसर पर देश-विदेश से 678 से अधिक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल अशीम कुमार घोष, यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की मुक्केबाज नूपुर श्योरन भी शामिल हुईं। उपराष्ट्रपति श्री राधाकृष्णन ने कहा कि द आर्ट ऑफ लिविंग आज 182 देशों में मानवता, शांति और मानवीय मूल्यों का संदेश पहुंचा रहा है। उन्होंने गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दूरदृष्टि और विनम्रता ने करोड़ों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
भय, तनाव और घृणा से मुक्त विश्व परिवार के निर्माण का आह्वान
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि ध्यान आज विलासिता नहीं बल्कि स्वस्थ, सुखी और तनाव मुक्त जीवन की आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने ज्ञान, ध्यान और संगीत को जीवनभर साथ रखने का संदेश देते हुए भय, तनाव और घृणा से मुक्त विश्व परिवार के निर्माण का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रारंभ की गई प्रमुख पहलों में यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम, फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स,आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इन्क्यूबेशन, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल तथा इको शांति शामिल हैं।
विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा
हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने गुरुदेव से भेंट के दौरान कहा कि इसी पावन भूमि पर प्रज्ज्वलित करुणा का दीपक आज 182 से अधिक देशों को आलोकित कर रहा है। वहीं नुपुर श्योराण ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सुदर्शन क्रिया के नियमित अभ्यास ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए और उन्हें विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली। कुसुम धीमान ने बताया कि पूरे महीने चले इस उत्सव में ध्यान, संस्कृति, सेवा, मानसिक स्वास्थ्य एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य गुरुदेव के तनाव-मुक्त एवं हिंसा-मुक्त समाज के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है l
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