अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर मचे घमासान के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने एक बेहद सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि राम मंदिर के चढ़ावे पर सामान्य चोरी नहीं बल्कि 'डाका' डाला गया है, जो देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों के अटूट विश्वास के साथ एक बड़ा धोखा है। नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए इसे 'तिरुपति मॉडल' पर चलाने और एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की पुरजोर वकालत की है।
पूरे देश में हलचल मचा दी
अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे (दान) में वित्तीय अनियमितताओं और गड़बड़ी के आरोपों के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के एक हालिया बयान ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे पर डाका डाला गया है और यदि जांच एजेंसियां उन्हें सबूत देने के लिए बुलाएंगी, तो वे निश्चित रूप से जाएंगे। उन्होंने मंदिर के वर्तमान प्रबंधन को बदलकर उसे आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति देवस्थानम की तर्ज पर संचालित करने का सुझाव दिया है।
"भक्तों के साथ हुआ धोखा, सात पीढ़ियों तक लगेगा श्राप"
नृपेंद्र मिश्रा ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में कहा, "यह बेहद पीड़ादायक है। अगर श्रद्धालुओं के योगदान की एक पाई भी गलत हाथों में गई है, तो यह विश्वास और चेहरे का नुकसान है, भक्त खुद को ठगा हुआ महसूस करेंगे। एक नागरिक के रूप में हर कोई आहत है।" उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर बेईमानी करने वालों को सात वंश (पीढ़ियों) तक इसका पाप और श्राप लगेगा।
CCTV फुटेज गायब होने पर उठाए गंभीर सवाल
मंदिर में हुई इस गड़बड़ी को लेकर नृपेंद्र मिश्रा ने सुरक्षा और पारदर्शिता पर भी सवाल दागे हैं। उन्होंने बताया कि कैश काउंटिंग के दौरान लापरवाही बरती गई और निगरानी की भारी कमी थी। यह बात सामने आई है कि कुछ अहम समय के सीसीटीवी फुटेज गायब हैं, जिन्हें ऑटो-डिलीट होना बताया जा रहा है। इस पर मिश्रा ने कहा कि अगर नीयत साफ होती, तो सीसीटीवी फुटेज की एक बैकअप कॉपी सुरक्षित रखी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि नोटों की गड्डियां गायब होने के इस खेल में बैंक भी पूरी तरह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
मंदिर प्रबंधन को 'तिरुपति मॉडल' और पेशेवर CEO की जरूरत
वर्तमान में राम मंदिर का दैनिक संचालन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। नृपेंद्र मिश्रा का मानना है कि अब राम मंदिर का पैमाना एक छोटे जिले के प्रशासन जितना बड़ा हो चुका है, जिसके लिए पेशेवर प्रबंधन अनिवार्य है। मंदिर परिसर के रोजमर्रा के कामकाज और वित्तीय लेन-देन को संभालने के लिए उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी को तैनात किया जाए, जिसके पास काम करने की स्वायत्तता हो।
रोजाना कैश की गिनती (तिरुपति मॉडल)
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की तरह अयोध्या में भी रोज़ाना चढ़ावे की गिनती होनी चाहिए और अगले ही दिन उसे पारदर्शी तरीके से नोटिस बोर्ड या जनता के सामने लाइव रखना चाहिए ताकि हर श्रद्धालु को पता हो कि कितना दान आया है। मिश्रा के अनुसार, मुख्य ट्रस्ट को केवल भक्तों के कल्याण और सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जबकि प्रशासनिक और वित्तीय मामले पेशेवरों के हाथ में होने चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठाई SIT जांच
इस चंदा चोरी और चढ़ावे में हेरफेर के मामले को विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उठाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत ऐक्शन लिया है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस एसआईटी जांच को 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
पूछताछ शुरू
एसआईटी ने मंदिर के कर्मचारियों, कैश काउंटिंग स्टाफ और ट्रस्ट से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस बड़ी लापरवाही या मिलीभगत के पीछे कौन-कौन शामिल है। नृपेंद्र मिश्रा के इस बेबाक बयान के बाद अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली और मंदिर के पूरे प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में पारदर्शिता बहाल करना अब सरकार और ट्रस्ट दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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