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The Haryana Story | पानीपत का अनोखा रेलवे स्टेशन: ट्रेनें भी रुकती हैं और यात्री भी आते हैं, पर नहीं मिलती टिकट, रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे मुसाफिर

पानीपत का अनोखा रेलवे स्टेशन: ट्रेनें भी रुकती हैं और यात्री भी आते हैं, पर नहीं मिलती टिकट, रेलवे की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे मुसाफिर

पिछले कई सालों से यह पूरा रेलवे स्टेशन भगवान भरोसे चल रहा है...

भारतीय रेलवे को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है, लेकिन हरियाणा के पानीपत जिले में एक ऐसा रेलवे सब-स्टेशन है जो रेलवे की घोर लापरवाही और अजीबो-गरीब व्यवस्था की कहानी बयां कर रहा है। हम बात कर रहे हैं पानीपत के इसराना रेलवे स्टेशन की। इस स्टेशन पर रोजाना ट्रेनें भी आती हैं और सैकड़ों यात्री भी पहुंचते हैं, लेकिन उनके पास सफर के लिए टिकट खरीदने का कोई जरिया नहीं है। पिछले कई सालों से यह पूरा रेलवे स्टेशन भगवान भरोसे चल रहा है।

टेंडर खत्म, सालों से बंद है टिकट काउंटर

इस अजीबोगरीब स्थिति की मुख्य वजह रेलवे का लचर रवैया है। दरअसल, इसराना रेलवे स्टेशन पर टिकट बनाने और काउंटर संभालने वाली प्राइवेट कंपनी का टेंडर कई साल पहले ही खत्म हो चुका है। टेंडर खत्म होने के बाद रेलवे ने यहां दोबारा टिकट बुकिंग क्लर्क या किसी ठेके का इंतजाम नहीं किया। नतीजा यह है कि स्टेशन का टिकट काउंटर सालों से धूल फांक रहा है और वहां ताला लटका हुआ है।

बिना टिकट सफर करने को मजबूर हैं सैकड़ों यात्री

इस रेलवे स्टेशन पर रोजाना करीब 12 ट्रेनें रुकती हैं। आस-पास के गांवों और इसराना कस्बे के सैकड़ों यात्री, छात्र और नौकरी पेशा लोग रोजाना पानीपत जंक्शन या रोहतक की तरफ जाने के लिए इस स्टेशन का रुख करते हैं। टिकट काउंटर बंद होने के चलते इन यात्रियों को मजबूरी में बिना टिकट (विदाउट टिकट) ही ट्रेन में सवार होना पड़ता है।

जान जोखिम में डाल अगले स्टेशन पर दौड़ते हैं मुसाफिर

टिकट न मिलने के कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कानूनन अपराधी न बनते हुए कई यात्री ट्रेन चलने पर अगले स्टेशन पर उतरकर दौड़ते हुए टिकट काउंटर की तरफ भागते हैं, ताकि वहां से टिकट खरीद सकें। इस अफरा-तफरी में कई बार यात्रियों की ट्रेन छूट जाती है, तो कई बार लोग चलती ट्रेन से उतरने-चढ़ने के चक्कर में हादसों का शिकार भी हो जाते हैं।

रेलवे की गलती, यात्रियों पर भारी जुर्माना

मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती। जब ये यात्री बिना टिकट पानीपत जंक्शन या अन्य बड़े स्टेशनों पर पहुंचते हैं, तो वहां तैनात टीटीई इन्हें पकड़ लेते हैं। अपनी मजबूरी बताने के बावजूद नियमों का हवाला देकर यात्रियों पर भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया जाता है। यात्रियों का कहना है कि टिकट न देना रेलवे की नाकामी है, लेकिन इसका आर्थिक और मानसिक खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

सुविधाओं के नाम पर 'सन्नाटा', न पानी न कर्मचारी

इसराना रेलवे स्टेशन पर सिर्फ टिकट की ही किल्लत नहीं है, बल्कि यह स्टेशन पूरी तरह से लावारिस हालत में है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। सुरक्षा या सहायता के लिए स्टेशन पर कोई रेल कर्मचारी मौजूद नहीं रहता। यह स्टेशन सिर्फ एक ऐसा ढांचा बनकर रह गया है जहां ट्रेनें आती हैं, लोग बैठते हैं और चले जाते हैं।

रेलवे को लग रहा है लाखों का चूना

इस अव्यवस्था से सिर्फ जनता ही परेशान नहीं है, बल्कि खुद भारतीय रेलवे को भी हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। 12 ट्रेनों के रुकने के बावजूद टिकट खिड़की से रेलवे की कमाई शून्य है। स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों ने कई बार रेलवे के उच्च अधिकारियों से यहां जल्द से जल्द टिकट काउंटर शुरू करने और सुविधाएं बहाल करने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

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