दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दस्तक देते ही बढ़ने वाले दमघोंटू वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला किया है। आगामी 1 अक्टूबर 2026 से प्रदेश के सभी एनसीआर जिलों में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' No PUC, No Fuel नीति को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस कड़े नियम के लागू होने के बाद, यदि किसी वाहन का पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी PUC सर्टिफिकेट वैध नहीं पाया गया, तो उसे किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिल सकेगा। इस नई व्यवस्था को मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त, पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार पेट्रोल पंपों पर अत्याधुनिक तकनीक का जाल बिछाने जा रही है।
पेट्रोल पंपों पर लगेंगे ANPR कैमरे, नियम टूटते ही नोजल होगी लॉक
इस नीति को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू करने के लिए सरकार हाईटेक सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा ले रही है:ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैनिंग: हरियाणा के एनसीआर के अंतर्गत आने वाले सभी 2,780 पेट्रोल पंपों पर अत्याधुनिक ANPR मतलब ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे इंस्टॉल किए जा रहे हैं। जैसे ही कोई कार, बाइक, ऑटो या अन्य भारी वाहन तेल भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर पहुंचेगा, ये कैमरे उसकी नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे। इसके बाद कैमरा पलक झपकते ही केंद्रीय 'VAHAN' डेटाबेस से वाहन का डेटा क्रॉस-चेक करेगा।
सिस्टम खुद रोक देगा सप्लाई
यदि वाहन का पीयूसी सर्टिफिकेट एक्सपायर हो चुका होगा, तो पेट्रोल पंप का सॉफ्टवेयर ऑटोमैटिक मोड पर चला जाएगा। वह फ्यूल डिस्पेंसिंग मशीन (ईंधन देने वाली मशीन) की नोजल को तुरंत लॉक कर देगा। यानी चाहकर भी पेट्रोल पंप कर्मी गाड़ी में तेल नहीं डाल सकेगा।
प्रदूषण फैलाने वालों की अब खैर नहीं, पूरे सिस्टम में सुधार की तैयारी
सरकार की इस सख्ती का सीधा उद्देश्य सड़कों पर दौड़ रहे उन लाखों वाहनों पर लगाम लगाना है, जो बिना पीयूसी सर्टिफिकेट के जहरीला धुआं उगल रहे हैं।पंप संचालकों की जिम्मेदारी तय: इस तकनीक के आने से पेट्रोल पंप कर्मियों और वाहन चालकों के बीच होने वाले विवादों पर रोक लगेगी, क्योंकि पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक होगी। नीति के लागू होने से पहले सरकार सभी पीयूसी सेंटर्स को भी अपग्रेड कर रही है ताकि जनता को सर्टिफिकेट लेने में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
हवा की सेहत में सुधार की उम्मीद
सर्दियों के महीनों में एनसीआर की हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। सरकार को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक कदम से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी। एनसीआर के जिलों जैसे गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, झज्जर आदि में रहने वाले सभी वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे समय रहते अपने वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच कर लें और उसे अपडेट रखें, ताकि 1 अक्टूबर के बाद उन्हें ईंधन के लिए परेशान न होना पड़े।
NCR के शहरों में दौड़ेंगी 925 इलेक्ट्रिक बसें
हरियाणा सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह से Eco-Friendly बनाने के लिए एक बड़े रोडमैप पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य सड़कों से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर आधुनिक और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को लागू करना है। सोनीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद में अभी लगभग 70 इलेक्ट्रिक बसें सुचारू रूप से यात्रियों को सेवाएं दे रही हैं। परिवहन विभाग के अनुसार, साल 2026 के अंत तक सोनीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल और रोहतक जैसे प्रमुख एनसीआर शहरों में कुल 925 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतारने का लक्ष्य तय किया गया है।
385 नई बसों का ऑर्डर
इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने 385 और नई इलेक्ट्रिक बसों के निर्माण के ऑर्डर जारी कर दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में फैसला लिया गया है कि प्रदूषण के स्तर को सटीक रूप से मापने के लिए 30 सितंबर से पहले राज्य में 23 नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन चालू किए जाएंगे। इन नए सेंटर्स के शुरू होने के बाद प्रदेश में कुल मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी, जिससे हर इलाके की हवा पर बारीक नज़र रखी जा सकेगी।
पुराने वाहनों पर सख्त कार्रवाई और स्क्रैपिंग
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने 10 से 15 साल पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे पुराने वाहनों को ज़ब्त करने और उन्हें स्क्रैप (नष्ट) करने के अभियान की रफ्तार को काफी तेज कर दिया गया है। इस बड़े कदम से न केवल दिल्ली-एनसीआर में शामिल हरियाणा के जिलों की हवा साफ होगी, बल्कि आम जनता को सुरक्षित, आधुनिक और धुआं-मुक्त सफर की सुविधा भी मिलेगी।
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