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The Haryana Story | अब हरियाणा की जेलों में कैदी सीखेंगे गोपालन के गुर, आत्मनिर्भरता की ओर जेल प्रशासन का बड़ा कदम

अब हरियाणा की जेलों में कैदी सीखेंगे गोपालन के गुर, आत्मनिर्भरता की ओर जेल प्रशासन का बड़ा कदम

करनाल से होगी शुरुआत, देश का प्रतिष्ठित संस्थान NDRI देगा ट्रेनिंग

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हरियाणा की जेलों में बंदियों के पुनर्वास और स्वावलंबन के लिए जेल प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है, जिसके तहत कैदियों को वैज्ञानिक तरीके से गोपालन (डेयरी फार्मिंग) की प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करनाल जिला जेल से की जा रही है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को अमलीजामा पहनाने के लिए जेल प्रशासन ने देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

एक अनूठी कार्ययोजना तैयार

हरियाणा की जेलों को अब केवल सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि सुधार गृह और कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी कड़ी में महानिदेशक कारागार आलोक मित्तल (IPS) के दिशा-निर्देशों पर जेल प्रशासन ने बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक अनूठी कार्ययोजना तैयार की है। अब सूबे की जेलों में बंद कैदियों को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से गोपालन तथा डेयरी फार्मिंग का ककहरा सिखाया जाएगा। इस योजना की शुरुआत करनाल की जिला जेल से होने जा रही है। इस विशेष प्रशिक्षण के लिए करनाल स्थित देश के शीर्ष संस्थान राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) के साथ एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

जेल परिसर में खुलेगी गोशाला, विशेषज्ञ सिखाएंगे डेयरी मैनेजमेंट

करनाल जिला जेल के अधीक्षक लखबीर सिंह ने बताया कि बंदियों के मानसिक सुधार और उनके आर्थिक पुनर्वास को ध्यान में रखकर यह खाका तैयार किया गया है। NDRI के वरिष्ठ वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जेल परिसर में आकर कैदियों को पशुओं की नस्ल सुधार, वैज्ञानिक तरीके से गोपालन और पशुओं के उचित रखरखाव की प्रोफेशनल ट्रेनिंग देंगे। डेयरी मैनेजमेंट व उद्यमिता: कैदियों को केवल दूध निकालना ही नहीं, बल्कि डेयरी मैनेजमेंट और डेयरी उद्यमिता के गुर भी सिखाए जाएंगे ताकि वे खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। दूध उत्पादन के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से बनने वाले अन्य बायो-प्रोडक्ट्स जैसे जैविक खाद, कंडे आदि को कैसे तैयार और उपयोग किया जाए, इसका भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

रिहाई के बाद रोजगार और समाज में सम्मानजनक वापसी का रास्ता

इस कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर पहुंचे गणमान्य अतिथियों और अधिकारियों ने इस कदम की जमकर सराहना की। इस अनूठी पुनर्वास पहल को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा की प्रत्येक जेल को 5 लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा की गई है ताकि अन्य जेलों में भी इस तरह की कौशल विकास गतिविधियां शुरू की जा सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जब कोई बंदी अपनी सजा पूरी करके जेल से बाहर समाज में लौटे, तो उसके पास एक ऐसी विद्या (हुनर) हो जिससे वह तुरंत सम्मानजनक आजीविका कमा सके और दोबारा अपराध की ओर न बढ़े।

प्रशिक्षण कैदियों को टिकाऊ आजीविका के साधन उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम साबित होगा

NDRI के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने भी इस बात पर पूरा भरोसा जताया है कि यह तकनीकी प्रशिक्षण कैदियों को टिकाऊ आजीविका के साधन उपलब्ध कराने में पूरी तरह सक्षम साबित होगा। जेल प्रशासन की यह सुधारात्मक सोच अपराधियों को सुधारकर उन्हें देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इस कार्य के लिए वित्तीय संकट आड़े न आए, इसके लिए सरकार और जनप्रतिनिधि भी आगे आए हैं। जेल अधीक्षक लखबीर सिंह ने जानकारी दी कि राज्यसभा सांसद ने हरियाणा की जेलों में गौशालाओं के निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की है। इस राशि का उपयोग गोशालाओं के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और साधनों को विकसित करने में किया जाएगा।"

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