दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है और 4 मासूम बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस नई कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में अब तक बचाए गए बच्चों की कुल संख्या 9 हो गई है।
दिल्ली पुलिस ने बच्चों का सौदा करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खिलाफ अपनी जांच तेज करते हुए एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर 10 और आरोपियों को दबोचा है और 4 और नवजातों/बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया है। इस रैकेट में शामिल आरोपियों में बच्चों के असली माता-पिता, बिचौलिए, तस्कर, खरीदार और एक अस्पताल का संचालक भी शामिल है।
कहाँ से रेस्क्यू हुए बच्चे और क्या है उनकी उम्र?
पुलिस ने जिन 4 बच्चों को मुक्त कराया है, उन्हें दिल्ली के अलावा बाहरी राज्यों से ट्रैक किया गया। रोहिणी (दिल्ली) से एक 16 दिन के नवजात को छुड़ाया गया। ऋषिकेश (उत्तराखंड) से 1 महीने के बच्चे को रेस्क्यू किया गया। हरिद्वार (उत्तराखंड) से 8 महीने का बच्चा बरामद हुआ। मथुरा (उत्तर प्रदेश) से 1 साल 1 महीने के बच्चे को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया।
कैसे हुआ इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़?
इस पूरे मामले का खुलासा पिछले महीने 5 जून को मध्य दिल्ली के आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास शुरू हुआ था। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक 'डमी ग्राहक' बनाकर जाल बिछाया था और एक नवजात को बेचने आए तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उस समय 4-5 दिन के एक बच्चे को बचाया गया था। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने इस संगठित नेटवर्क की परतों को खोला है।
3 से 9 लाख रुपये में होता था मासूमों का सौदा
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पूरी तरह 'डिमांड और सप्लाई' के मॉडल पर काम कर रहा था। गिरोह के सदस्य ऐसे गरीब या मजबूर जैविक माता-पिता की तलाश करते थे जो पैसे के लिए या अन्य कारणों से अपने बच्चे को छोड़ने के लिए तैयार हों। इसके अलावा कुछ मामलों में कुंवारी माताओं या अनचाही प्रेग्नेंसी वाले बच्चों को डॉक्टरों की मदद से गायब कर दिया जाता था।
गिरोह इन बच्चों को बहुत कम पैसों में हासिल करता था। इसके बाद देश के अलग-अलग राज्यों (जैसे दिल्ली, हरियाणा, यूपी) के अमीर और निसंतान दंपतियों को 3 लाख से लेकर 9 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनी दिखाने के लिए यह सिंडिकेट फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट और जाली मेडिकल रिकॉर्ड भी तैयार करवाता था।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के अनुसार, इस पूरे मामले में अब तक गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ चुका है और कुल 9 बच्चों को रेस्क्यू कर लिया गया है। सभी रेस्क्यू किए गए बच्चों को 'चाइल्ड वेलफेयर कमेटी' के सामने पेश किया गया है, जिसने उनकी सुरक्षा, पुनर्वास और देखभाल के लिए जरूरी निर्देश जारी किए हैं। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और पैसों के लेन-देन को खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के बाकी नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म किया जा सके।
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