हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए मेडिकल रीइंबर्समेंट यानी चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। सरकार ने चिकित्सा खर्च का लाभ उठाने के लिए आश्रितों की मासिक आय सीमा को ₹3,500 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 13 जुलाई 2026 को इसके आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
एक बड़ी और राहत भरी खबर
यह हरियाणा के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य लाभ के दायरे को बढ़ाते हुए मेडिकल रीइंबर्समेंट नीति में बड़ा संशोधन किया है। सरकार के नए फैसले के तहत अब उन आश्रितों का चिकित्सा खर्च भी सरकार उठाएगी, जिनकी मासिक आय ₹9,000 तक है। पहले यह सीमा महज ₹3,500 प्रति माह तय थी, जिसके कारण एक बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने माता-पिता या अन्य आश्रितों के इलाज का क्लेम नहीं ले पाते थे।
19 साल पुराने नियम में हुआ संशोधन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह महत्वपूर्ण बदलाव वर्ष 2007 में बनाए गए नियमों में संशोधन करके किया गया है। बीते सालों में बढ़ी महंगाई और जीवन यापन की बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कर्मचारी संगठनों द्वारा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की जा रही थी। सरकार ने इस विसंगति को दूर करते हुए इसे ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ा दिया है।
वित्त विभाग ने दी मंजूरी, आदेश लागू
इस कल्याणकारी प्रस्ताव को वित्त विभाग द्वारा 26 जून 2026 को ही अपनी लिखित सहमति दे दी गई थी। वित्त विभाग की हरी झंडी मिलने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने इसके औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग ने इस आदेश की कॉपियां राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, महालेखाकार को तुरंत प्रभाव से लागू करने और नए प्रावधानों के अनुसार ही मेडिकल बिल क्लियर करने के निर्देश के साथ भेज दी हैं।
किसे और कैसे मिलेगा इस फैसले का लाभ?
अब यदि किसी कर्मचारी या पेंशन भोगी के माता-पिता या अन्य तय श्रेणी के आश्रितों की खुद की मासिक आय जैसे कोई छोटी पेंशन या अन्य स्रोत ₹9,000 या इससे कम है, तो वे मेडिकल क्लेम के पात्र माने जाएंगे। गंभीर बीमारियों या अचानक अस्पताल में भर्ती होने के दौरान होने वाले भारी-भरकम खर्चों से अब कर्मचारियों को अपनी जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी। इससे पहले फैमिली आईडी या आय प्रमाण पत्रों में ₹3,500 से थोड़ी भी अधिक आय दिखने पर विभाग द्वारा मेडिकल रीइंबर्समेंट के दावों को खारिज कर दिया जाता था, जिससे अब कर्मचारियों को पूरी तरह निजात मिलेगी। हरियाणा सरकार के इस फैसले का राज्य के करीब 3 से 4 लाख कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने स्वागत किया है और इसे स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बेहद संवेदनशील कदम बताया है।
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