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The Haryana Story | राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी

SIT से मांगी प्रगति रिपोर्ट, 20 जुलाई को अगली सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और गबन मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में दायर चार जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से एक सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

यह रिपोर्ट आगामी सोमवार तक सौंप दी जाएगी

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर और चोरी का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई 2026) को इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की SITको जांच की प्रगति रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है और पूछा है कि इस जांच टीम में कौन-कौन शामिल हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को आश्वस्त किया कि यह रिपोर्ट आगामी सोमवार तक सौंप दी जाएगी।

याचिकाओं में क्या की गई है मांग?

सुप्रीम कोर्ट में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, हिंदू धर्म परिषद और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा कुल चार याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें ये प्रमुख मांगें की गई हैं:

स्वतंत्र जांच: पूरे घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।

फॉरेंसिक और CAG ऑडिट: राम मंदिर ट्रस्ट के खातों का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

पारदर्शिता: ट्रस्ट गठन के बाद से अब तक मिले सभी नकद, डिजिटल भुगतान, सोने-चांदी और विदेशी चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।

सबूतों की सुरक्षा: मंदिर के काउंटिंग रूम (दान पात्र कक्ष) के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वित्तीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए।

अब तक की जांच में क्या आए हैं मोड़?

यूपी सरकार ने इस कथित घोटाले की गंभीरता को देखते हुए पहले ही तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था, जिसकी शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी कैमरों की समीक्षा में लगभग 70 ऐसी संदिग्ध घटनाएं दिखीं, जहां पैसे गिनने वाले कर्मचारी नकदी के बंडल छिपाते नजर आए। यूपी पुलिस ने अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो न्यायिक हिरासत में हैं। विवाद के तूल पकड़ने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने 6 जुलाई को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है।

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