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The Haryana Story | फिरोजपुर झिरका में केवल कागजों पर चला 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर', 27 महीने तक 'बंद भवन' का जाता रहा किराया, 5.4 लाख की रिकवरी की सिफारिश

फिरोजपुर झिरका में केवल कागजों पर चला 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर', 27 महीने तक 'बंद भवन' का जाता रहा किराया, 5.4 लाख की रिकवरी की सिफारिश

कर्मचारी ने अपनी ही मां के घर में खुलवा दिया केंद्र, जांच के दायरे में तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी

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हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले के फिरोजपुर झिरका में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित होने वाले अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर (यू-एएएम) सेंटर में एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय घोटाला सामने आया है, सीएम विंडो पर दर्ज शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने मामले की परतों को खोला, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। जांच समिति ने तत्कालीन दो सिविल सर्जनों, डिप्टी सिविल सर्जन और एक सूचना सहायक को इस घोटाले का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और 5.4 लाख रुपये की सरकारी राशि की रिकवरी की सिफारिश की है।

कागजों में चलता रहा अस्पताल, 27 महीने तक लगा रहा ताला

जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्ष 2024 से मार्च 2026 के बीच अंजाम दिया गया. सरकार की तरफ से स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए जिस निजी भवन को किराए पर लिया गया था, वह पूरे 27 महीनों तक पूरी तरह बंद और गैर-कार्यशील रहा इस तथाकथित सेंटर में न तो कभी ओपीडी चली और न ही कोई स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं, केंद्र को चालू दिखाने के लिए कागजों पर सब दुरुस्त था, लेकिन धरातल पर वहां किसी भी डॉक्टर या कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई थी। अस्पताल बंद होने के बावजूद, एनएचएम के सरकारी खाते से हर महीने लगभग 20 हजार रुपये की राशि बतौर किराया नियमित रूप से जारी की जाती रही।

कर्मचारी ने अपनी ही मां के घर में खुलवा दिया केंद्र

इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार एनएचएम का इन्फॉर्मेशन असिस्टेंट वसीम अकरम बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वसीम अकरम ने Conflict of Interest के नियमों को ताक पर रखकर अपनी ही मां के मालिकाना हक वाले भवन को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के लिए किराए पर पास करवा दिया। उसने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से यह बात पूरी तरह छुपाए रखी कि यह इमारत उसके अपने ही परिवार की है। वर्तमान सिविल सर्जन डॉ. ज्योत्सना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बताया कि वसीम अकरम के खिलाफ प्रथम दृष्टया प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के पुख्ता सबूत मिले हैं, जिसके बाद उसके सभी प्रभार तुरंत प्रभाव से वापस ले लिए गए हैं।

जांच के दायरे में तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी

इस खेल में केवल छोटा कर्मचारी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी शामिल रहे, जिन्होंने बिना किसी भौतिक सत्यापन के फाइलों को पास किया और सरकारी खजाने को चूना लगाया। डिप्टी सिविल सर्जन और तत्कालीन दो सिविल सर्जन की भूमिका इस घोटाले में संदिग्ध पाई गई है। हालांकि, तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों के बयान अभी तक दर्ज नहीं हो सके हैं, जिसके कारण उनके संबंध में अंतिम टिप्पणी आनी बाकी है। सीएम विंडो के एमीनेंट पर्सन नितिन दूबे ने बताया कि जिले में केवल यही नहीं, बल्कि ऐसे कई और केंद्र भी केवल कागजों में संचालित होने की शिकायतें मिल रही हैं।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

जांच समिति ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों और सरकार को भेज दी है। रिपोर्ट में साफ तौर पर 5.4 लाख रुपये की रिकवरी करने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का खाका तैयार किया गया है। अब इस मामले में सरकार के स्तर से अंतिम गाज गिरनी बाकी है, जिससे नूंह के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। 

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