हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों की सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ हरियाणा का गौरव प्रतीक राज्य गीत "जय जय जय हरियाणा" भी पूरी आन-बान और शान के साथ गूंजेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरव, और राज्य के प्रति गहरी सम्मान भावना को विकसित करना है।शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। आदेश को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विद्यालयों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
सप्ताह में एक दिन गायन अनिवार्य
प्रत्येक राजकीय विद्यालय की सुबह की प्रार्थना सभा के तुरंत बाद, सप्ताह में कम से कम एक दिन इस राज्य गीत का सामूहिक व गरिमापूर्ण गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। विद्यार्थियों और शिक्षकों को सही लय, सुर और शुद्ध उच्चारण सिखाने के लिए निदेशालय सभी स्कूलों को गीत के लिरिक्स (बोल) और MP3 ऑडियो फाइल उपलब्ध करवा रहा है। स्कूल प्रिंसिपलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस गीत की कॉपियां छात्रों को उपलब्ध कराएं और जरूरत पड़ने पर इसका प्रिंटआउट निकालकर बच्चों में वितरित करें।
हाउस सिस्टम और प्रार्थना संचालक
स्कूलों में स्थापित हाउस सिस्टम के जरिए बच्चों को इस गीत का नियमित अभ्यास कराया जाएगा। साथ ही, जो छात्र रोज सुबह प्रार्थना सभा का संचालन करते हैं, उन्हें विशेष रूप से तैयार किया जाएगा ताकि वे पूरे स्कूल का सही ढंग से नेतृत्व कर सकें।
'जय जय जय हरियाणा' राज्य गीत की खास बातें
यह कोई साधारण गीत नहीं है, बल्कि यह हरियाणा की आत्मा, इतिहास और प्रगति का एक जीवंत दस्तावेज है। इस बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायी राज्य गीत की रचना पानीपत के प्रख्यात साहित्यकार डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने की है। कुल 21 पंक्तियों का यह गीत करीब 3 मिनट लंबा है। इसे विधानसभा की 5 सदस्यीय विशेष कमेटी द्वारा 12 बैठकों के विस्तृत मंथन के बाद अंतिम रूप दिया गया था।
गीत में हरियाणा को वेदों की पावन भूमि बताया गया है। इसमें कुरुक्षेत्र की भूमि, महाभारत का इतिहास, गीता का ज्ञान, और भौगोलिक पहचान के रूप में शिवालिक व अरावली पर्वत श्रृंखलाओं सहित यमुना और प्राचीन सरस्वती नदी के महत्व का अद्भुत गुणगान है। इसमें हरियाणवी जीवनशैली की सादगी को "दूध-दही का खाणा" पंक्ति के जरिए पिरोया गया है। साथ ही राज्य की लोक कलाओं जैसे सांग और रागनी का भी जिक्र है।
राष्ट्रीय योगदान को नमन
गीत में देश का पेट भरने वाले हरियाणा के मेहनती किसानों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल लाने वाले खिलाड़ियों और देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों को सलाम किया गया है। गीत का अंत हरियाणा की मूल पहचान "अतिथि देवो भवः" की गौरवशाली परंपरा के साथ होता है।
सरकार और शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कदम से स्कूली बच्चों में अपने राज्य के प्रति लगाव बढ़ेगा। आधुनिकता की दौड़ में बच्चे अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों से दूर न हों, बल्कि वे गर्व से कह सकें कि वे इस पावन और ऐतिहासिक धरा का हिस्सा हैं। यह गीत विद्यार्थियों में एकता, अनुशासन और देश-प्रदेश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास कराने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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