नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त फटकार लगाते हुए कहा है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना की तैनाती केवल एक कामचलाऊ व्यवस्था है, यह कोई स्थायी इलाज या समाधान नहीं है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को सालों से कामचलाऊ और अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसी ढर्रे की वजह से लगातार व्यवस्था में दिक्कतें पैदा हुई हैं।
अब कोर्ट खुद सालभर सरकार के हर कदम की बारीकी से निगरानी करेगा
चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक और व्यवस्थागत कमियों को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय में तीखी सुनवाई हुई। न्यायालय ने 'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन' (FAIMA) व अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को व्यापक और पुख्ता सुधार करने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह देश के लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकता और अब कोर्ट खुद सालभर सरकार के हर कदम और परीक्षा सुधारों की बारीकी से निगरानी करेगा।
'वायुसेना की तैनाती स्थायी इलाज नहीं' – कोर्ट की बड़ी टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान जब केंद्र सरकार ने पेपर लीक के बाद परीक्षा की सुचिता बनाए रखने के लिए री-टेस्ट के दौरान भारतीय वायुसेना के विमानों और बुलेटप्रूफ गाड़ियों से प्रश्नपत्रों को ट्रांसपोर्ट करने जैसे असाधारण कदमों का हवाला दिया, तो शीर्ष अदालत ने इसे नाकाफी बताया। पीठ ने कहा ऐसी आपातकालीन या अस्थायी व्यवस्थाएं लंबे समय तक नहीं चल सकतीं। आपको परीक्षा सुधारों को संस्थागत रूप देना होगा। यहाँ समस्या थी तो आपने वायुसेना तैनात कर दी, लेकिन यह सिर्फ एक कामचलाऊ व्यवस्था है, स्थायी समाधान नहीं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पिछले कई सालों से देश की राष्ट्रीय परीक्षाओं को एड-हॉक (तदर्थ) नीतियों के भरोसे चलाया जा रहा है, जिससे पूरा सिस्टम खोखला हो गया है और बार-बार लीक की घटनाएं हो रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और NTA को नया आदेश
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार के पिछले हलफनामे पर असंतोष व्यक्त करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक नया और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर पूरी योजना मांगी है :
राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट : कोर्ट ने पूछा कि परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गठित डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?
IIT मॉडल अपनाना : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के परीक्षा मॉडल को किस प्रकार अपनाया जा रहा है?
ऑनलाइन टेस्ट पर शिफ्टिंग : अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में बदलने की क्या तैयारी है? डेटा ट्रांसफर कैसे होगा और साइबर सुरक्षा व डेटा प्रोटेक्शन के क्या उपाय होंगे?
हाई-टेक वेरिफिकेशन : परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़े और डमी उम्मीदवारों को रोकने के लिए 'डिजीयात्रा' जैसी आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीकों के इस्तेमाल पर सरकार का क्या प्रस्ताव है?
सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका : परीक्षा चक्र (प्री एग्जाम, ड्यूरिंग और पोस्ट एग्जाम) के हर चरण पर निगरानी के लिए हाल ही में नियुक्त किए गए अतिरिक्त महानिदेशकों की अब तक की प्रगति क्या है?
सरकार का पक्ष: 'छात्रों के भविष्य से नहीं करेंगे समझौता'
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार छात्रों के हितों और परीक्षा की शुचिता को लेकर शीर्ष स्तर पर बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार "10 कदम आगे बढ़कर" काम करने को तैयार है और कोर्ट द्वारा दिए जाने वाले हर सुझाव को पूरी तरह लागू किया जाएगा। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि जल्द ही सभी जरूरी सुधारों के विस्तृत ब्योरे के साथ नया हलफनामा कोर्ट के समक्ष पेश कर दिया जाएगा। इसी बीच, पेपर लीक माफियाओं पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार सख्त कदम उठा रही है।
हम इस प्रक्रिया पर बहुत बारीकी से नजर रखेंगे
सूत्रों के मुताबिक, कानून को और कड़ा करने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में संशोधन करने और पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अगले सोमवार (आगामी सुनवाई) के लिए सूचीबद्ध किया है। पीठ ने साफ लफ्जों में कहा है 'हम इस प्रक्रिया पर बहुत बारीकी से नजर रखेंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि परीक्षा सुधारों को कानूनी और संस्थागत रूप दिया जाए और हम पूरे साल इस पर निगरानी रखेंगे।'
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