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The Haryana Story | मोहन भागवत के 'संवाद' वाले बयान के चंद घंटों बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET विवाद और 'CJP' आंदोलन के आगे झुकी सरकार

मोहन भागवत के 'संवाद' वाले बयान के चंद घंटों बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET विवाद और 'CJP' आंदोलन के आगे झुकी सरकार

मोहन भागवत के बयान को सीधे तौर पर देश में चल रहे छात्र आंदोलनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था, 'हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।' भागवत ने कहा था- आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है। भागवत का बयान आने के बाद ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। जिसके चलते इस बयान को सीधे तौर पर देश में चल रहे छात्र आंदोलनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या मोहन भागवत के बयान और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे में कोई संबंध है?

राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर दोनों घटनाओं का सीधा जुड़ाव माना जा रहा है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में 'विश्व मांगल्य सभा' के एक कार्यक्रम में कहा कि हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता... आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है, हमें आदेश देने के बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए और तर्क समझाना चाहिए। 

दबाव की राजनीति

मोहन भागवत का यह बयान ठीक उस समय आया जब दिल्ली की सड़कों पर नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर छात्र संगठन विशेषकर कॉकरोच जनता पार्टी पिछले एक महीने से भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।भागवत के इस बयान के तुरंत बाद केंद्र सरकार बैकफुट पर आई। संघ प्रमुख द्वारा युवाओं की आवाज सुनने और तानाशाही या मनमानी न करने की नसीहत के कुछ ही घंटों के भीतर धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आरएसएस प्रमुख के इस कड़े रुख के बाद ही सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने का मन बनाया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की असली वजह

धर्मेंद्र प्रधान पर पिछले कई हफ़्तों से नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणालियों में गड़बड़ी को लेकर पद छोड़ने का भारी दबाव था। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर इस्तीफे की घोषणा करते हुए लिखा कि 'जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे... इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन की बड़ी जीत

यह इस्तीफा भारत के इतिहास में युवाओं और छात्रों के सबसे बड़े और अनोखे आंदोलनों में से एक की परिणति है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवा जश्न मना रहे हैं। CJP के प्रवक्ताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका ने सरकार के साथ हुई बैठक के बाद आंदोलन को आधिकारिक रूप से वापस लेने का ऐलान किया है।

सरकार ने मानी मांगें

सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें स्वीकार कर ली हैं, जिसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, NEET विवाद के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई न करना शामिल है। विपक्षी दलों, जिनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हैं, ने इसे देश के युवाओं और लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया है।

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