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The Haryana Story | जेलों की सुरक्षा फेल? सलाखों के पीछे से कैसे ऑपरेट हो रहा है अरबों का ड्रग्स-हथियारों का धंधा? क्या है अमेरिकी FBI का 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'?

जेलों की सुरक्षा फेल? सलाखों के पीछे से कैसे ऑपरेट हो रहा है अरबों का ड्रग्स-हथियारों का धंधा? क्या है अमेरिकी FBI का 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'?

लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया पिछले एक दशक से अधिक समय से भारतीय जेलों में बंद, इसके बावजूद वे दुनिया के कई महाद्वीपों में चला रहे अपने बड़े अपराध नेटवर्क

लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया पिछले एक दशक से अधिक समय से भारतीय जेलों में बंद हैं, लेकिन इसके बावजूद वे दुनिया के कई महाद्वीपों में अपने बड़े अपराध नेटवर्क को चला रहे हैं। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत दर्ज की गई हालिया चार्जशीट ने इस कड़वे सच को पूरी तरह उजागर कर दिया है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत दर्ज हालिया चार्जशीट ने साफ कर दिया है कि भारतीय जेलों में बंद लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया जैसे गैंगस्टर सलाखों के पीछे से ही दुनिया के कई महाद्वीपों में अपना विशाल आपराधिक नेटवर्क चला रहे हैं।

सलाखों के पीछे राज, समंदर पार अपराध

भारतीय जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया जैसे गैंगस्टरों ने दुनिया भर में अपना एक खूंखार नेटवर्क तैयार कर लिया है। इस कड़वे सच पर से पर्दा किसी भारतीय एजेंसी ने नहीं, बल्कि अमेरिकी जांच एजेंसी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) ने अपनी हालिया कार्रवाई में उठाया है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) ने इन गैंगस्टरों के वैश्विक साम्राज्य की पोल खोलकर रख दी है।

क्या है 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'?

'ऑपरेशन हार्ड बॉल' अमेरिका, कनाडा और यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों का एक संयुक्त और बड़ा अभियान है। इस ऑपरेशन के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी फेडरल कोर्ट में कुल 37 आरोपियों के खिलाफ तीन अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई हैं। छापों के दौरान 1,000 किलोग्राम से अधिक कोकीन, हथियार, और भारी मात्रा में विदेशी नकदी जब्त की गई है। यह चार्जशीट मुख्य रूप से तीन बड़े गिरोहों पर केंद्रित है - लॉरेंस बिश्नोई गैंग, जग्गू भगवानपुरिया सिंडिकेट और कनाडा का रविंदर सिंह ढांडा नेटवर्क।

जेलों से कैसे चलता है यह इंटरनेशनल सिंडिकेट?

लॉरेंस बिश्नोई जो वर्तमान में गुजरात की साबरमती जेल में है और जग्गू भगवानपुरिया जो असम की सिलचर जेल में बंद है,  पिछले एक दशक से अधिक समय से भारत की जेलों में हैं। इसके बावजूद उनका नेटवर्क थमने का नाम नहीं ले रहा है। चार्जशीट के मुताबिक, ये गैंगस्टर जेल के भीतर चोरी-छिपे पहुंचाए गए स्मगल्ड मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप और सिग्नल के जरिए विदेशों में बैठे अपने कमांडरों से सीधे जुड़े रहते हैं।

लॉरेंस बिश्नोई जेल से बैठकर निर्देश देता है, जबकि विदेशों में उसके भरोसेमंद साथी जैसे गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका और रोहित गोदारा यूरोप इन आदेशों को जमीन पर लागू करते हैं। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, जग्गू भगवानपुरिया के सिंडिकेट में दुनिया भर में 1,000 से अधिक सक्रिय सदस्य और शूटर फैले हुए हैं।

इस चार्जशीट के 4 सबसे बड़े और चौंकाने वाले खुलासे

अमेरिकी न्याय विभाग की इस चार्जशीट ने कुछ बेहद गंभीर मामलों को उजागर किया है। इस चार्जशीट में पहली बार आधिकारिक तौर पर यह आरोप लगाया गया है कि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने जेल के अंदर से ही कनाडा में हुई खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की साजिश रची और आदेश दिया था।

पंजाब पुलिस के अफसर की मिलीभगत

इस सिंडिकेट के तार भारतीय सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से भी जुड़े हैं। चार्जशीट में पंजाब पुलिस के एक पूर्व एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम सामने आया है, जो गैंगस्टरों के साथ मिलकर अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के परिवारों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूल रहा था। इस खुलासे के बाद पंजाब पुलिस ने नागरा को गिरफ्तार भी कर लिया है।

सोशल मीडिया से भर्ती का खतरनाक तरीका

ये गैंग सोशल मीडिया इंस्टाग्राम आदि पर हथियारों और रसूख का प्रदर्शन करके पंजाब के गरीब, भटके हुए और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं या नाबालिगों को फंसाते हैं। उन्हें जल्द पैसा कमाने और विदेश अमेरिका,कनाडा भेजने का लालच देकर अपने गिरोह का हिस्सा बना लिया जाता है। ये सिंडिकेट सिर्फ हत्या या जबरन वसूली तक सीमित नहीं हैं। ये कमर्शियल ट्रकों के जरिए अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच भारी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं।

अब आगे क्या होगा?

अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी धरती पर किसी भी विदेशी आपराधिक संगठन को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अमेरिकी जांच एजेंसियां अब लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार से औपचारिक मांग करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर रही हैं ताकि उन्हें अमेरिकी अदालतों में ट्रायल का सामना करने के लिए अमेरिका ले जाया जा सके। भारत और अमेरिका के बीच 1997 से प्रत्यर्पण संधि लागू है, लेकिन चूंकि इन गैंगस्टरों पर भारत में भी कई गंभीर मुकदमे चल रहे हैं, इसलिए यह कानूनी प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल हो सकती है। हालांकि, 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इन गैंगस्टरों का नेटवर्क अब केवल स्थानीय कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संकट बन चुका है।

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