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The Haryana Story | पानीपत जमीन विवाद : पुलिस जांच पर गंभीर सवाल, याचिकाकर्ता का आरोप 1990 में मृत व्यक्ति के नाम से दर्ज कर दिया बयान, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

पानीपत जमीन विवाद : पुलिस जांच पर गंभीर सवाल, याचिकाकर्ता का आरोप 1990 में मृत व्यक्ति के नाम से दर्ज कर दिया बयान, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

अडाणी एग्री लॉजिस्टिक से जुड़े जमीन विवाद का मामला अब पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गया

हरियाणा के पानीपत जिले के गांव नौल्था में अडाणी एग्री लॉजिस्टिक से जुड़े जमीन विवाद का मामला अब पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गया है। मामले में याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष आरोप लगाया है कि पुलिस की ओर से अदालत में पेश किए गए कुछ गवाहों की जानकारी की जांच करने पर गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इनमें एक कथित गवाह के अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स से जुड़े होने और दूसरे व्यक्ति की वर्ष 1990 में मृत्यु हो जाने का दावा शामिल है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सार्वजनिक रिकॉर्ड में जितेंद्र सिंह वर्सेस अडाणी लोजिस्टिक्स (पानीपत) लिमिटेड एंड अनॉदर मामला सीआर-6185-2023 के रूप में दर्ज है।

फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और हस्ताक्षरों में भी जालसाजी की गई

मामला नौल्था गांव की कृषि भूमि से जुड़े कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े का है। वर्ष 2023 में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2.5 एकड़ जमीन को लेकर विवाद में अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स से जुड़े छह कर्मचारियों समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जमीन पर कब्जे के उद्देश्य से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और हस्ताक्षरों में भी जालसाजी की गई। उस समय प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता बानी सिंह और उनके बेटे जितेंद्र कुमार ने आरोप लगाया था कि उन्होंने जमीन बेचने से इनकार किया था, जिसके बाद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि हस्ताक्षरों की जांच में उन्हें फर्जी पाए जाने का दावा किया गया था। 

पुलिस की गवाही पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

अब मामले की जांच को लेकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। उनके अनुसार, पुलिस ने दिसंबर 2025 में अदालत में दाखिल जवाब में विवादित जमीन के आसपास रहने वाले कुछ लोगों के बयान पेश किए थे। इनमें अजय पुत्र जयपाल, प्रताप पुत्र श्रीचंद, कृष्ण उर्फ अमित और राजबीर पुत्र बारू के नाम बताए गए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने इन लोगों के बारे में अपने स्तर पर जानकारी जुटाई तो पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करने वाली बातें सामने आईं।

उनका दावा है कि अजय अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स से जुड़ा कर्मचारी है, जबकि राजबीर पुत्र बारू की मृत्यु वर्ष 1990 में ही हो चुकी थी। यदि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज और मृत्यु प्रमाणपत्र अदालत की जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए गए बयान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल यह याचिकाकर्ता का आरोप है और अंतिम निष्कर्ष अदालत की जांच के बाद ही सामने आएगा।

FSL रिपोर्ट ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

याचिकाकर्ता के अनुसार, जमीन से संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की जांच के लिए FSL रिपोर्ट भी कराई गई थी। उनका दावा है कि 4 नवंबर 2025 को प्राप्त FSL रिपोर्ट में विवादित दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों में कथित तौर पर मेल नहीं पाया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री की सीएम विंडो पर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि कथित जालसाजी सामने आने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। 

गिरफ्तारी को लेकर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ता का एक और आरोप पुलिस के उस जवाब को लेकर है, जिसमें कथित तौर पर आरोपियों को जांच में शामिल कर गिरफ्तार किए जाने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए और उन्हें अदालत के रिकॉर्ड में भी गिरफ्तारी का स्पष्ट विवरण नहीं मिला। यह आरोप भी फिलहाल न्यायिक परीक्षण के अधीन है। पुलिस का आधिकारिक पक्ष और केस डायरी में मौजूद रिकॉर्ड इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।

2023 से हाईकोर्ट में लंबित है मामला

इस विवाद के संबंध में वर्ष 2023 में FIR दर्ज होने के बाद मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में CR-6185-2023 के रूप में जितेंद्र सिंह बनाम अडाणी एग्री लॉजिस्टिक्स (पानीपत) लिमिटेड और अन्य मामला दर्ज है। अब याचिकाकर्ता द्वारा पुलिस की जांच पर लगाए गए नए आरोपों के बाद मामला और गंभीर हो गया है। खास तौर पर कथित मृत गवाह के बयान और कंपनी से जुड़े बताए जा रहे गवाह की पहचान जैसे मुद्दे अदालत के सामने महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

हाईकोर्ट के अगले कदम पर नजर

याचिकाकर्ता के मुताबिक, मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली से संबंधित दस्तावेज हाईकोर्ट के समक्ष रखे गए हैं और अदालत ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि विवादित गवाहों के बयान किस आधार पर दर्ज किए गए, दस्तावेजों की जांच किस स्तर तक हुई और मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई। सबसे अहम बात यह है कि मृत व्यक्ति के नाम से बयान दर्ज किए जाने का आरोप यदि रिकॉर्ड से प्रमाणित होता है, तो यह केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस जांच की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है।

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