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The Haryana Story | हरियाणा रोडवेज का दो दिन चक्का जाम का ऐलान, 17 सूत्रीय मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम

हरियाणा रोडवेज का दो दिन चक्का जाम का ऐलान, 17 सूत्रीय मांगों पर सरकार को अल्टीमेटम

सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान

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हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। बुधवार को प्रदेशभर के रोडवेज डिपो और सब-डिपो में कर्मचारियों ने दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया। सिरसा डिपो सहित विभिन्न स्थानों पर कर्मचारियों ने सरकार और परिवहन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। इसी कड़ी में रोडवेज कर्मचारी साझा मोर्चे ने 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय राज्यव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है।

आश्वासनों के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में रोष 

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से सरकार और परिवहन विभाग के समक्ष रखी जा रही हैं। कई दौर की बातचीत और आश्वासनों के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों का समाधान कर दिया तो चक्का जाम को टालने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन मांगें लंबित रहीं तो 5 और 6 सितंबर को प्रदेशभर में रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित करने वाला आंदोलन किया जाएगा।

आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा

नाथूसरी चौपटा में हुई अहम बैठक इस आंदोलन को लेकर सिरसा डिपो के नाथूसरी चौपटा बस स्टैंड पर रोडवेज यूनियनों के साझा मोर्चे की बैठक भी हुई। बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों ने आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा की और अलग-अलग कर्मचारी संगठनों से चक्का जाम में सहयोग करने की अपील की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में कई रोडवेज यूनियनों के पदाधिकारी शामिल हुए और मांगों के समाधान के लिए संयुक्त रूप से आंदोलन आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। 

17 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

बुधवार के दो घंटे के प्रदर्शन के दौरान रोडवेज कर्मचारियों ने अपने महाप्रबंधकों को परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। इन ज्ञापनों में कर्मचारियों की 17 सूत्रीय मांगों को उठाया गया है। साझा मोर्चे का कहना है कि सरकार को बार-बार मांगों से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। 26 अगस्त के प्रदेशव्यापी प्रदर्शन के दौरान मांग-पत्र सौंपने और आगामी आंदोलन का नोटिस देने का निर्णय पहले ही घोषित किया गया था।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

रोडवेज कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में परिचालकों का पे-ग्रेड बढ़ाना, लिपिकों की तर्ज पर तीन वेतन वृद्धि देना, चालक और परिचालकों के खाली पदों पर नई भर्ती, समयबद्ध प्रमोशन पॉलिसी लागू करना तथा चालकों को हैवी पे-ग्रेड देना शामिल है। इसके अलावा स्टैंड इंचार्ज का अलग पद सृजित करने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों ने वर्ष 2016 में भर्ती चालकों को नियुक्ति तिथि से नियमित करने, चालक, परिचालक, उप निरीक्षक, निरीक्षक और कर्मशाला कर्मचारियों को पहले की तरह अर्जित अवकाश देने तथा वर्ष 2018 में भर्ती कर्मशाला कर्मचारियों को तकनीकी पदों पर पदोन्नति देने की मांग की है। इसके साथ ही HKRN के तहत लगे परिचालकों और हेल्परों को नियमित करने, दादरी डिपो के 52 हेल्परों को पक्का करने, रोडवेज के निजीकरण पर रोक लगाने, इलेक्ट्रिक बसों का सरकारीकरण करने तथा घाटे वाली किलोमीटर स्कीम की बसों के ठेके समाप्त करने जैसी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं।

सरकार को आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

रोडवेज कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने पहले भी कई बार मांगों पर विचार करने और समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। कर्मचारियों का आरोप है कि हर बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन मांगों को लागू करने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारी नेताओं रिछपाल सिंह, कृष्ण कड़वासरा और चमन स्वामी ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान करने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते मांगें पूरी नहीं कीं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

यात्रियों पर पड़ सकता है असर

यदि 5 और 6 सितंबर का प्रस्तावित चक्का जाम वापस नहीं लिया गया, तो इन दो दिनों में हरियाणा रोडवेज की बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे रोजाना रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने साफ किया है कि सरकार यदि आंदोलन से पहले मांगों पर सकारात्मक फैसला करती है तो चक्का जाम स्थगित किया जा सकता है। अब नजर सरकार और रोडवेज कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो 5 और 6 सितंबर का दो दिवसीय चक्का जाम प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए बड़ा आंदोलन साबित हो सकता है।

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