नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस आपदा के बाद 288 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क स्थापित नहीं हो सका है, जबकि 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार संपर्क से बाहर लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों के कई बड़े समूह भी शामिल हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि किसी व्यक्ति का “uncontactable” होना यह साबित नहीं करता कि वह लापता या घायल है। आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा जिले और नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में हुआ है। अचानक आई बाढ़ ने सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में मोबाइल और अन्य संचार सेवाएं बाधित होने के कारण वहां मौजूद भारतीय नागरिकों से संपर्क करना मुश्किल बना हुआ है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के कई समूह संपर्क से बाहर
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, संपर्क से बाहर भारतीयों में तमिलनाडु के 37 और 49 लोगों के दो अलग-अलग समूह शामिल हैं। ये दोनों समूह अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय रसुवा जिले के तिमुरे इलाके में होने की जानकारी थी। वहीं रिचा टूर्स के माध्यम से यात्रा करने वाले 61 भारतीय और केरल के 33 भारतीय भी अभी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 57 लोगों का एक समूह भी आपदा की चपेट में आया। एक बस में सवार 20 लोग बच निकलने में सफल रहे, जबकि दूसरी बस के बारे में गंभीर चिंता जताई गई है।
21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। ये सभी तमिलनाडु से संबंधित समूह के बताए गए हैं। उन्हें काठमांडू पहुंचाने और इसके बाद भारत वापस भेजने की व्यवस्था की जा रही है। भारत सरकार लगातार नेपाल के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के माध्यम से प्रभावित भारतीय नागरिकों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर हादसे पर संवेदना जताई और नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने की बात कही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, संचार बना सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल में सेना, सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 15 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं, जिनमें नेपाली सेना के हेलीकॉप्टरों के अलावा सशस्त्र पुलिस बल और निजी ऑपरेटरों के हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। घायलों के इलाज के लिए मेडिकल सेंटर भी स्थापित किए गए हैं। भारत का विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास लगातार नेपाल प्रशासन के संपर्क में है। भारतीय दूतावास ने प्रभावित नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन भी जारी की है।
भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन: +977 985 131 6807 +977 970 910 7500 +977 981 032 6117 इन नंबरों पर WhatsApp के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
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