नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। हिमनद ढहने से आई अचानक बाढ़ और मलबे के सैलाब ने नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। नेपाल में अब तक 389 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 288-90 के करीब भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 84 भारतीयों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।
तीन दिन बाद फिर बाढ़ का खतरा
तबाही के बीच सबसे बड़ी चिंता अब तिब्बत में बनी नई बैरियर झील को लेकर है। हिमस्खलन और चट्टानों के खिसकने से नदी का प्रवाह बाधित होने के बाद पानी जमा होकर झील का रूप ले चुका है। अधिकारियों और विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि झील का जलस्तर तेजी से बढ़ा या प्राकृतिक बांध टूटा तो आने वाले दिनों में दोबारा विनाशकारी बाढ़ आ सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित इलाकों में पहले ही सड़कें, पुल, गांव और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा तबाह हो चुका है। ऐसे में नई बाढ़ आने पर राहत और बचाव अभियान के सामने चुनौती कई गुना बढ़ सकती है।
बाढ़ के बीच नेपाल में भूकंप के झटके
बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे नेपाल में गुरुवार रात 3.2 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भूकंप रात करीब 9:18 बजे आया और इसका केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले से आपदा झेल रहे लोगों में दहशत और बढ़ गई। हालांकि, मौजूदा तबाही का मुख्य कारण भूकंप नहीं बल्कि हिमनद के ढहने से उत्पन्न फ्लैश फ्लड और मलबे का तेज बहाव बताया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और बर्फ-चट्टान के टूटने से भारी मात्रा में पानी, पत्थर और मिट्टी नीचे की ओर आई, जिसने नदी घाटियों में स्थित बस्तियों और ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया।
290 भारतीय अभी भी लापता, 84 का रेस्क्यू
भारत के लिए भी यह आपदा बेहद चिंताजनक है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 84 भारतीयों को बचाया जा चुका है। भारत सरकार नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तिब्बत की ओर भी भारतीय नागरिकों के फंसे होने की सूचना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल और चीन में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है। भारत का विदेश मंत्रालय नेपाल के अधिकारियों, अन्य संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और टूर ऑपरेटरों के साथ समन्वय कर रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा बड़ा असर
आपदा ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के जिस क्षेत्र में तबाही हुई है, वहां बड़ी संख्या में तीर्थयात्री और विदेशी पर्यटक आवाजाही करते हैं। खराब मौसम, सड़क और पुलों के बह जाने तथा संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण लापता लोगों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
नेपाल में 389 मौतें, तिब्बत में भी तीन की जान गई
उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में 389 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हैं। नेपाल में 910 लोगों के लापता होने की सूचना है। दूसरी ओर, तिब्बत के ग्यारोंग क्षेत्र में तीन लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों तरफ लापता लोगों की संख्या 1,468 तक पहुंचती है।
सेना और सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा
आपदा के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के हजारों जवान प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने और शवों की तलाश का काम जारी है। लेकिन सड़कें और पुल टूटने के कारण कई इलाकों तक जमीनी पहुंच अभी भी मुश्किल बनी हुई है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता तिब्बत में बनी नई झील को लेकर है।
यदि इसका जलस्तर बढ़ता है और प्राकृतिक बांध टूटता है, तो नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे नदी क्षेत्रों में फिर अचानक बाढ़ आ सकती है। ऐसे में पहले से तबाह इलाकों में अगले कुछ दिन राहत और बचाव के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। नोट: शुरुआती रिपोर्टों में मौत और लापता लोगों के आंकड़े तेजी से बदल रहे हैं। इसलिए खबर में 389 मौतें, 1,468 कुल लापता और 290 भारतीयों के संपर्क से बाहर होने के आंकड़े उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर दिए गए हैं।
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