हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल अब आर-पार की लड़ाई में बदल गई है। करीब एक महीने से अधिक समय से चल रहे आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा जानकारी के मुताबिक पालिका रोल (पे-रोल) और हरियाणा कौशल रोजगार निगम से जुड़े करीब 30 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की गई है।
इससे पहले सरकार अलग-अलग जिलों में दर्ज मामलों में नामजद कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी। कर्मचारियों ने सरकार की कार्रवाई के बावजूद आंदोलन वापस लेने से इनकार किया है। नगर पालिका कर्मचारी संघ ने हड़ताल को अब 9 सितंबर तक बढ़ा दिया है। सरकार की ओर से कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए 5 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन कई जिलों में कर्मचारी वापस ड्यूटी पर नहीं लौटे।
6 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन
हरियाणा में नगरपालिका, नगर निगम और परिषदों से जुड़े सफाई कर्मचारियों का मौजूदा राज्यव्यापी आंदोलन 6 अगस्त 2026 से शुरू हुआ था। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने 13 मई 2026 को उनके साथ समझौता किया था, लेकिन समझौते में मानी गई मांगों को लागू करने के लिए आवश्यक पत्र/आदेश जारी नहीं किए गए। हड़ताल के शुरुआती दिनों में कर्मचारियों ने धरने और प्रदर्शन किए। इसके बाद आंदोलन लगातार तेज होता गया और प्रदेश के कई शहरों में कूड़े के ढेर लगने लगे। 29 अगस्त तक आंदोलन 24वें दिन में पहुंच चुका था और 5 सितंबर को यह 31वें दिन भी जारी रहा।
13 मई के समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 13 मई के समझौते में करीब 13,093 पालिका रोल कर्मचारियों को स्थायी करने सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी थी। इसके अलावा रिक्त पदों को भरने, ठेका व अस्थायी कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा देने, न्यूनतम वेतन, ईएसआई-पीएफ और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए थे। कर्मचारियों का आरोप है कि समझौता होने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया। यही विवाद बाद में अगस्त की हड़ताल का बड़ा कारण बना।
सरकार ने 5 सितंबर तक काम पर लौटने का दिया था अल्टीमेटम
हड़ताल लंबी खिंचने और शहरों में सफाई व्यवस्था बिगड़ने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया। कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने साफ संकेत दिया कि आदेश का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन 5 सितंबर तक भी कई जगह कर्मचारी धरने पर बैठे रहे। झज्जर में अल्टीमेटम के आखिरी दिन कर्मचारियों ने काम पर लौटने से इनकार कर दिया। पानीपत में भी सफाई और दमकल कर्मचारी अल्टीमेटम के बावजूद वापस ड्यूटी पर नहीं आए। अब सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए पे-रोल और HKRN से जुड़े करीब 30 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने का कदम उठाया है।
अभी तक किन मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत हुई?
हड़ताल के दौरान कई शहरों में प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था से कूड़ा उठाने की कोशिश के दौरान कर्मचारी और पुलिस/प्रशासन आमने-सामने आए।
हिसार हिसार में कूड़ा उठाने के दौरान टकराव
सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल रहा। पुलिस के अनुसार कूड़ा उठाने वाली गाड़ी को रोकने, कर्मचारियों से हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में कार्रवाई हुई। 6 सितंबर को हिसार नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान सुरेंद्र उर्फ गोलू को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली गाड़ी पर हमले के मामले में हुई। इससे पहले हिसार में 16 नामजद कर्मचारियों और करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
चरखी दादरी चरखी दादरी में प्रशासन द्वारा कूड़ा उठाने की कार्रवाई के दौरान एक दर्जन से ज्यादा सफाई कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई के बाद कर्मचारी संगठनों और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया। यमुनानगर-जगाधरी यमुनानगर-जगाधरी में प्रशासन ने पुलिस की मदद से डंपिंग प्वाइंट से कूड़ा उठाने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान करीब 39 प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया।
नरवाना नरवाना में भी हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय का गेट बंद कर दिया था। 3 सितंबर को पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। फरीदाबाद में मंत्री के कार्यालय के बाहर हंगामा फरीदाबाद में सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन उस समय उग्र हो गया जब कर्मचारी मंत्री विपुल गोयल के कार्यालय के बाहर पहुंचे। रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान बलवीर ने सुरक्षा वाहन पर चढ़कर प्रदर्शन किया। इस मामले में बलवीर को निलंबित किया गया और छह कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
बहादुरगढ़ में पुलिस और कर्मचारियों में टकराव
झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में भी कूड़ा उठाने को लेकर प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच तनाव बढ़ा। वैकल्पिक सफाई व्यवस्था के तहत कूड़ा उठाने पहुंची टीम का कर्मचारियों ने विरोध किया। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस और कर्मचारियों के बीच झड़प की स्थिति बनी और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई की। हिसार और बहादुरगढ़ को आंदोलन के दौरान टकराव वाले प्रमुख केंद्रों में गिना गया।
कितने सफाई कर्मचारी हैं? पक्के और कच्चे का आंकड़ा क्या है?
सरकार के सामने आए आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा के शहरी स्थानीय निकायों में 13,093 सफाई कर्मचारी पालिका रोल पर कार्यरत हैं। सरकार इन्हें हरियाणा कॉन्ट्रैक्चुअल एम्प्लॉयज (सिक्योरिटी ऑफ सर्विस) एक्ट, 2024 के दायरे में लाने की तैयारी में है। इसका मतलब यह है कि इन्हें अभी सीधे नियमित सरकारी कर्मचारी घोषित नहीं किया गया है। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में पात्र कर्मचारियों को 60 साल की उम्र तक सेवा सुरक्षा देने की बात है। 10 साल से अधिक सेवा वाले पात्र कर्मचारियों के लिए कुल मासिक देय राशि 25,560 रुपये, जिसमें वेतन, जोखिम भत्ता और अन्य भत्ते शामिल हैं, बताई गई है।
इसके अलावा 2,000 रुपये मासिक जोखिम भत्ता, महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी आदि लाभों का भी उल्लेख किया गया है। लेकिन 13,093 को “पक्के कर्मचारी” कहना सही नहीं होगा। ये पालिका रोल के कर्मचारी हैं और नियमितीकरण ही आंदोलन की मुख्य मांगों में से एक है। वहीं, पूरे प्रदेश में ठेका/आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहे सफाई कर्मचारियों की एक अलग, अद्यतन और आधिकारिक कुल संख्या सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिली है। इसलिए इस संख्या को बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के बताना उचित नहीं होगा।
सरकार ने कौन-कौन सी मांगें मानीं?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 1 सितंबर को विधानसभा में कहा था कि सफाई कर्मचारियों से जुड़ी 13 में से 12 मांगें सरकार मान चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय में विचाराधीन मामलों का समाधान अदालत के निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। सरकार की ओर से जिन प्रमुख राहतों/फैसलों की जानकारी सामने आई है, उनमें पात्र पालिका रोल कर्मचारियों को 60 साल तक सेवा सुरक्षा देने की तैयारी।
10 साल से अधिक सेवा वाले पात्र कर्मचारियों के लिए 25,560 रुपये तक मासिक देय राशि। 2,000 रुपये मासिक जोखिम भत्ता। सालाना वेतन वृद्धि का लाभ। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का लाभ। ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ। पात्र कर्मचारियों को हरियाणा कॉन्ट्रैक्चुअल एम्प्लॉयज सिक्योरिटी ऑफ सर्विस एक्ट/नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया। सरकार द्वारा अदालत में लंबित मामलों में न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई का आश्वासन।
फिर कर्मचारी हड़ताल क्यों खत्म नहीं कर रहे?
यहीं से सरकार और कर्मचारियों के बीच असली टकराव शुरू होता है। सरकार का कहना है कि 13 में से 12 मांगें मान ली गई हैं और नौकरी की सुरक्षा सहित आर्थिक लाभ दिए जा रहे हैं। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन इसे नियमितीकरण का विकल्प नहीं मान रहे। कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि लंबे समय से काम कर रहे कच्चे/पालिका रोल और ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए, ठेका प्रथा खत्म की जाए और 13 मई के समझौते को लिखित आदेश के साथ पूरी तरह लागू किया जाए। यानी सरकार “जॉब सिक्योरिटी” की बात कर रही है, जबकि कर्मचारी “रेगुलराइजेशन” चाहते हैं। यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी गांठ है।
कौन सी मांग अभी भी अटकी हुई है?
सबसे बड़ी लंबित मांग नियमितीकरण है। सरकार का तर्क है कि इससे जुड़े कुछ मामले कानूनी/न्यायिक दायरे में आते हैं और अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में भी यही बात कही थी। इसके अलावा कर्मचारी ठेका प्रथा समाप्त करने, आउटसोर्स कर्मचारियों को विभागीय रोल पर लेने और 13 मई के समझौते को पूरी तरह लागू करने** पर भी अड़े हुए हैं।
आंदोलन का असर
शहरों में कूड़े के ढेर एक महीने से ज्यादा समय से चल रही हड़ताल का सीधा असर प्रदेश की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। कई शहरों में सड़क, बाजार और डंपिंग प्वाइंट कूड़े से भर गए। प्रशासन ने कई जगह जेसीबी, डंपर और वैकल्पिक कर्मचारियों की मदद से कूड़ा उठाने की कोशिश की, लेकिन कई स्थानों पर हड़ताली कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। हिसार, बहादुरगढ़, चरखी दादरी, यमुनानगर-जगाधरी, फरीदाबाद, पानीपत, जींद, नरवाना और गुरुग्राम समेत कई शहरों में आंदोलन का असर देखने को मिला है। गुरुग्राम में हड़ताल दूसरे महीने में पहुंचने के बाद कचरा प्रबंधन की समस्या और गंभीर हुई।
सरकार की कार्रवाई और कर्मचारियों की हड़ताल आमने-सामने है। एक तरफ सरकार ने 5 सितंबर तक ड्यूटी ज्वाइन करने का अल्टीमेटम दिया और अब बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी है। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन
9 सितंबर तक हड़ताल जारी रखने पर अड़े हैं। सरकार की ओर से एस्मा के तहत कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में तीन मुद्दे सबसे अहम रहेंगे बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली, 13 मई के समझौते का लिखित क्रियान्वयन और कच्चे/ठेका कर्मचारियों के नियमितीकरण पर सरकार का फैसला। फिलहाल सरकार और कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा मतभेद यही है कि सरकार सेवा सुरक्षा को समाधान बता रही है, जबकि कर्मचारी पक्की नौकरी को अंतिम समाधान मान रहे हैं।
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