दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए वास्तु शास्त्र विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें आधुनिक डिजाइन के साथ वास्तु को जोड़ने पर फोकस रखने को प्रेरित किया गया। कार्यशाला का आयोजन डीएलसीसुपवा के हेरिटेज क्लब व इंटेक रोहतक चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
फैकेल्टी ऑफ प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर के सेमीनार हॉल में आयोजित कार्यशाला में वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ आर्किटेक्ट अनुराग भारद्वाज मुख्य वक्ता रहे। सुपवा पहुंचने पर इंटेक रोहतक चैप्टर के कन्वीनर डॉ अजय कौशिक, फैकेल्टी कॉर्डिनेटर अजयबाहू जोशी, हेरिटेज क्लब की कन्वीनर आर्किटेक्ट सुप्री महेश्वरी ने वास्तु विशेषज्ञ अनुराग भारद्वाज का स्वागत किया। इस दौरान वर्कशॉप कॉर्डिनेटर असिस्टेंट प्रोफेसर श्रुति गौतम व हिमांशु फौगाट ने मुख्या वक्ता का छात्रों से परिचय कराया।
वर्कशॉप की शुरुआत में भारद्वाज ने छात्रों को भारतीय वास्तु परंपरा, उसके मूल सिद्धांतों व आधुनिक वास्तुकला में उसकी प्रासंगिकता से परिचित कराया। उन्होंने छात्रों को बताया कि वास्तु शास्त्र केवल भवन निर्माण से संबंधित नियमों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण, ऊर्जा, दिशा और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने वाली भारतीय ज्ञान परंपरा है। छात्रों को पंचतत्व, यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के महत्व व भवन की योजना में इनके प्रभाव के बारे में विस्तार से समझाया गया।
कार्यशाला के दौरान दिशाओं, वास्तु पुरुष मंडल, भूखंड चयन, भवन के प्रवेश द्वार, कमरों की स्थिति, प्रकाश व वेंटिलेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर फोकस किया गया। छात्रों को उदाहरणों व व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि पारंपरिक वास्तु सिद्धांतों को आधुनिक डिजाइन की आवश्यकताओं के साथ किस तरह से जोड़ा जा सकता है। वास्तु विशेषज्ञ अनुराग भारद्वाज ने कहा कि वास्तु शास्त्र का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण व आलोचनात्मक सोच के साथ किया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों को किसी भी वास्तु सिद्धांत को आंख मूंदकर अपनाने के बजाय उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व पर्यावरणीय संदर्भ को समझने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला के समापन पर सुपवा परिवार की ओर से मुख्य वक्ता व उनकी टीम के सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। वहीं, छात्रों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक व उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें भारतीय वास्तु परंपराओं को समझने व आधुनिक वास्तुकला में उनकी संभावित भूमिका पर विचार करने का नया दृष्टिकोण मिला। यह आयोजन उनमें भारतीय वास्तु विरासत के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उनके डिजाइन कौशल को समृद्ध करने की दिशा में आगे चलकर महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
डीएलसीसुपवा में वास्तु शास्त्र पर आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता के साथ हेरिटेज क्लब व इंटेक की टीम।
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