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The Haryana Story | 85 की उम्र में MA में, अब PHD की तैयारी, तीन युद्ध लड़े, खेलों में जीते 200 पदक, पढ़ें पूर्व फौजी लालचंद गोदारा की प्रेरक कहानी

85 की उम्र में MA में, अब PHD की तैयारी, तीन युद्ध लड़े, खेलों में जीते 200 पदक, पढ़ें पूर्व फौजी लालचंद गोदारा की प्रेरक कहानी

देश सेवा के बाद शिक्षा की अलख जगा रहे लालचंद, 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में निभाई थी अहम भूमिका

सिरसा। उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम करना पसंद करते हैं, उस उम्र में पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर रहे हैं। देश की सेवा करने के बाद उन्होंने पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा और 85 वर्ष की उम्र में भी शिक्षा के प्रति उनका जुनून बरकरार है। एमए की डिग्री हासिल करने के बाद अब वह पीएचडी करने की तैयारी में जुटे हैं। लालचंद गोदारा का जीवन संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरक कहानी है। उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए देश की सुरक्षा के लिए सेवाएं दीं। वर्ष 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में सैनिक के रूप में अपनी भूमिका निभाने वाले लालचंद ने सेना से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ-साथ खेलों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

81 साल की उम्र में लिया एमए में दाखिला

लालचंद गोदारा ने बताया कि जब उन्हें महसूस हुआ कि पढ़ाई के जरिए समाज के लिए कुछ और किया जा सकता है, तो उन्होंने शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया। 76 वर्ष की उम्र में पढ़ाई शुरू करने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने 81 वर्ष की उम्र में एमए में दाखिला लिया। पढ़ाई के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उम्र बढ़ने के साथ पढ़ने-लिखने में कठिनाइयां भी आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और लगन के दम पर एमए की डिग्री हासिल की। अब उनका लक्ष्य पीएचडी करना है, जिसके लिए वह तैयारी कर रहे हैं।

देश की सुरक्षा के लिए सीने पर खाईं गोलियां

लालचंद गोदारा ने वर्ष 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में सैनिक के रूप में देश की सेवा की। उन्होंने बताया कि सेना में रहते हुए देश की सुरक्षा के लिए सीने पर गोलियां खाने का हौसला रखा। सेना से जुड़ा अनुशासन आज भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनका कहना है कि जीवन में किसी भी मंजिल को पाने के लिए उम्र को बाधा नहीं बनने देना चाहिए। दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

खेलों में भी हासिल किए करीब 200 पदक

पूर्व सैनिक लालचंद गोदारा ने खेलों में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करीब 200 पदक दर्ज हैं। इनमें लगभग 150 स्वर्ण, 30 रजत और 20 कांस्य पदक शामिल हैं। नौकरी पूरी करने के बाद भी उन्होंने खेलों से नाता नहीं तोड़ा और हेमर व डिस्कस थ्रो जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना जारी रखा। उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने खुद को सक्रिय बनाए रखा।

रोजाना 11 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं लालचंद गोदारा

लालचंद गोदारा अपनी सेहत को लेकर भी काफी सजग हैं। वह रोजाना करीब 11 किलोमीटर दौड़ लगाते हैं। नियमित व्यायाम और अनुशासित दिनचर्या को अपनी सक्रियता का अहम हिस्सा मानते हैं। 85 वर्ष की उम्र में पढ़ाई, खेल और नियमित दौड़ के प्रति उनका समर्पण युवाओं के लिए भी प्रेरणा का संदेश देता है। लालचंद गोदारा अब पीएचडी की तैयारी के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अपने संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं।

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