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The Haryana Story | खेल-खेल में धक्का देने पर विवाद, नाबालिग ने नाबालिग की छाती में घोंपा चाकू! सवाल सिर्फ बच्चे की मौत का नहीं, हमारी परवरिश का भी है!!

खेल-खेल में धक्का देने पर विवाद, नाबालिग ने नाबालिग की छाती में घोंपा चाकू! सवाल सिर्फ बच्चे की मौत का नहीं, हमारी परवरिश का भी है!!

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया; आरोपी नाबालिग व उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज

प्रतीकात्मक तस्वीर

फरीदाबाद। शहर के सेक्टर-56 स्थित आशियाना फ्लैट्स में खेल-खेल में शुरू हुआ मामूली विवाद उस समय खौफनाक वारदात में बदल गया, जब एक नाबालिग बच्चे ने दूसरे नाबालिग बच्चे की छाती में चाकू घोंप दिया। गंभीर रूप से घायल 13 वर्षीय कन्नू को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वारदात के बाद आरोपी नाबालिग चाकू लेकर मौके से फरार हो गया। मामले में पुलिस ने आरोपी बच्चे और उसके माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

घर के बाहर छोटी बहन को खिला रहा था

कन्नू मृतक कन्नू सेक्टर-56 स्थित आशियाना फ्लैट्स में अपने परिवार के साथ रहता था। परिजनों के मुताबिक रविवार शाम करीब सात बजे कन्नू घर के बाहर अपनी करीब एक साल की छोटी बहन चाहत को खिला रहा था। इसी दौरान ब्लॉक नंबर-13 में रहने वाला 15 वर्षीय किशोर वहां पहुंचा। दोनों बच्चे साथ में खेलने लगे। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। देखते ही देखते मामूली कहासुनी ने गंभीर रूप ले लिया और आरोपी किशोर ने कथित तौर पर चाकू निकालकर कन्नू की छाती में वार कर दिया। वारदात के बाद वह चाकू लेकर मौके से फरार हो गया।

पड़ोसियों ने दी परिजनों को सूचना

कन्नू के चाचा इकबाल के मुताबिक, घटना की जानकारी पड़ोसियों ने फोन कर परिवार को दी। इसके बाद परिजन आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल कन्नू को उपचार के लिए अस्पताल ले गए। उसे बादशाह खान सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, बच्चे को दूसरे बच्चे के साथ कहासुनी के बाद चाकू मारे जाने की सूचना मिली थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

कन्नू के पिता यामिन मूल रूप से अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से फरीदाबाद में रह रहे हैं। करीब पांच साल पहले परिवार ने सेक्टर-56 के आशियाना फ्लैट्स में मकान लेकर रहना शुरू किया था। यामिन कबाड़ की फेरी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। कन्नू परिवार में बड़ा बेटा नहीं था। उसका बड़ा भाई आमिर है, जिसकी शादी दीपावली के बाद होनी है। कन्नू से छोटी उसकी करीब एक साल की बहन है। जिस मासूम बहन को कन्नू घटना से कुछ समय पहले खिला रहा था, उसे क्या पता था कि कुछ ही देर बाद उसका भाई हमेशा के लिए उससे दूर हो जाएगा।

आरोपी नाबालिग और उसके माता-पिता पर केस

पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपी नाबालिग और उसके माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि नाबालिग के पास चाकू कहां से आया और घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था। पुलिस अधिकारियों ने घटना को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों और उनकी मानसिक स्थिति पर ध्यान देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि माता-पिता को यह देखना चाहिए कि बच्चे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं, किस तरह के गेम खेल रहे हैं और उनका व्यवहार किस दिशा में जा रहा है।

सवाल सिर्फ एक बच्चे की मौत का नहीं, हमारी परवरिश का भी है

यह घटना केवल दो बच्चों के बीच हुए झगड़े की कहानी नहीं है। यह समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के हाथों में हिंसा और चाकू जैसी चीजें कैसे पहुंच रही हैं? खेल के मैदान या घर के बाहर होने वाली सामान्य नोकझोंक अगर चाकूबाजी और हत्या तक पहुंच जाए तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। बच्चों के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट की पहुंच बढ़ रही है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे केवल बच्चों की पढ़ाई और नंबरों पर ध्यान न दें, बल्कि उनके व्यवहार, दोस्तों, ऑनलाइन गतिविधियों, गेम्स और मानसिक स्थिति को भी समझें।

समाज के लिए संदेश

बच्चों को सिर्फ पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें सही और गलत के बीच फर्क समझाना भी जरूरी है। गुस्सा आने पर हाथ उठाना, हिंसा को सामान्य समझना या किसी विवाद का जवाब हथियार से देना बच्चों के भविष्य के साथ-साथ पूरे समाज के लिए खतरनाक है। माता-पिता बच्चों से रोज कुछ समय खुलकर बात करें, उनकी गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें समझाएं कि किसी भी विवाद का समाधान हिंसा नहीं है। क्योंकि बचपन में बोई गई सोच ही आगे चलकर व्यक्तित्व बनाती है। आज अगर हम बच्चों के व्यवहार और संगत को नजरअंदाज करेंगे, तो कल ऐसी घटनाएं किसी और परिवार का घर उजाड़ सकती हैं।

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