अमेरिका से सैन्य विमान आया और इस विमान डिपोर्ट हुए भारतीय ही नहीं आए, बल्कि कई सपने भी दफन हो गए।104 भारतीयों की अलग-अलग कहानी है। सब अपना-अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। ऐसे ही सभी युवाओं कहानी कुछ ऐसी ही है जिसे सुन भावुक होना लाजिमी है। कोई बहुत ज्यादा परेशान है, कोई भावुक है तो कोई अपने घर न आकर अपने रिश्तेदार के घर चला गया। घरौंडा के गांव के कालरों के आकाश, जिसकी करीब 20 साल उम्र और उसने भी सपना देखा और बाहर जाने की जिद की और बड़े भाई ने भी उसकी जिद्द के आगे अपनी नहीं चलाई और उसे भेज दिया यूएस।
आकाश को भेजने के लिए जमीन के ढाई एकड़ बेच दिए और एजेंट से किस्तों में बात हुई 65 लाख की। करीब 10 महीने पहले आकाश गया और 26 जनवरी को उसने मैक्सिको की दीवार कूदी जिसके बाद वो यूएसए में पहुंच गया था। डोंकी से जाने के दो रास्ते होते हैं , एक सीधा मैक्सिको और उसके बाद दीवार कूदकर अमेरिका और एक रास्ता होता है, कई देशों को फ्लाइट, टैक्सी , कैंटर, बस, जंगल, समुद्र, पार करते हुए जाना। एजेंट ने आकाश के परिवार से पैसे लिए वो सीधे मैक्सिको पहुंचाने के लिए , पर भेजा गया उसे दूसरे रास्ते से। आकाश के भाई ने कुछ वीडियो भी दिखाए जो कि जंगलों के हैं।
26 जनवरी को आकाश से आखिरी बार बात हुई जब वो मैक्सिको की दीवार कूदकर पहुंच गया था अमेरिका और उसे वहां चौकी में पकड़ लिया था, उसके बाद कुछ समय बाद रहकर उसका बॉन्ड बुलना था पर उससे पहले आकाश को डर दिखाया जाता है रिमांड का और डिपोर्ट वाले कागजात पर साइन करवा लिए जाते हैं। आकाश के भाई शुभम को कल दोपहर को पता चला कि उसका भाई वापिस आ रहा है क्योंकि 26 जनवरी के बाद उसकी बात नहीं हुई थी।
कल जब शाम को आकाश का फोन मिलाया गया तो फोन मिल रहा था, और बताया कि वो वापिस आ रहा है, आकाश का 72 लाख रुपए खर्चा आ जाता है। आकाश सुबह अपने घर आया और अपने मामा के साथ उनके घर चला गया। उनके भाई ने जंगलों के कुछ वीडियो भी दिखाए हैं, परिवार की हालत बुरी हो गई है, परिवार चाहता है एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई हो और कोई भी डोंकी से ना जाए। ऐसे समय में सबको साथ देने की जरूरत है ।
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