हरियाणा कांग्रेस के सीनियर नेताओं के बीच जारी वर्चस्व की जंग के चलते पार्टी को हरियाणा में लगातार तीसरी बार अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। पार्टी की हार के पीछे प्रमुख कारणों में से पार्टी का संगठनात्मक ढांचा न खड़ा हो पाना एक बड़ी वजह माना गया। बावजूद इसके लंबा समय गुजर जाने के बावजूद भी न तो पार्टी हाई कमान हरियाणा के कांग्रेस नेताओं के बीच जारी अस्तित्व और डोमिनेन्स की लड़ाई को खत्म करवा पाई और न ही अब तक संगठन खड़ा कर पाई है।
पार्टी के तमाम दिग्गज इसी जुगत में लगे हैं कि....
हालांकि पिछले महीने पार्टी हाई कमान ने जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठन खड़ा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिसके जल्दी ही अमली जामा पहनाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। अभी इसी कड़ी में पार्टी के तमाम दिग्गज इसी जुगत में लगे हैं कि संगठन में उनके ज्यादा से ज्यादा वफादार और करीबियों को जगह मिले ताकि पार्टी में उनकी स्थिति मजबूत रहे और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में जिस भी नेता या धड़े के जिला अध्यक्ष सबसे ज्यादा होंगे भविष्य में पार्टी में वह हावी रहेगा।
ज्यादा से ज्यादा वफादार और करीबियों को जिला अध्यक्ष की कुर्सी मिले
हरियाणा में कई वरिष्ठ नेता पिछले कुछ सालों से पार्टी में अस्तित्व और वर्चस्व इस की जंग में एक दूसरे के आमने-सामने रहे हैं। पार्टी के इन नेताओं में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, बीरेंद्र सिंह और कप्तान अजय यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं का नाम शामिल है। इन सभी की कोशिश है कि उनके ज्यादा से ज्यादा वफादार और करीबियों को जिला अध्यक्ष की कुर्सी मिले, क्योंकि उनके खेमे के जितने ज्यादा नेता संगठन में होंगे। उनका कद उतना ही बड़ा होगा।
दिग्गजों का भविष्य काफी हद तक संगठनात्मक नियुक्तियों के ऊपर निर्भर होगा
ऐसे में कांग्रेस और पार्टी के दिग्गजों का भविष्य काफी हद तक संगठनात्मक नियुक्तियों के ऊपर निर्भर होगा। जिन दिग्गजों के करीबी संगठन में सबसे ज्यादा जगह पाने में सफल होंगे भविष्य में उनकी स्थिति पार्टी में मजबूत रहनी वाजिब है । हालांकि यह पार्टी हाई कमान के लिए आसान नहीं होगा कि पार्टी में विपरीत खेमों को साधते और संतुलित रखते हुए संगठन खड़ा किया जाए। गौरतलब है कि गत विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे के बाद दो मुख्य धड़े आमने-सामने नजर आए। टिकट बंटवारे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी दिग्गज भूपेंद्र सिंह हुड्डा की एक तरफा चली तो कुमारी सैलजा गुट ने अपनी अनदेखी के आरोप लगाए।
......ताकि कोई भी खेमा नाराज ना हो
पार्टी हाई कमान द्वारा हरियाणा में संगठन खड़ा करने के लिए नियुक्त किए गए ऑब्जर्वरों द्वारा सबमिट की गई पैनल लिस्ट में से उम्मीदवारों की शॉर्ट लिस्टिंग का काम जारी है और जल्द ही जिला अध्यक्षों की सूची आने की उम्मीद की जा रही है। पैनलों को शार्ट लिस्ट करके उनमें 3-3 नाम रखे जाएंगे। बता दें कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने जिलाध्यक्ष के लिए 6-6 के नाम के पैनल बनाए जो कि प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद को सौंपे जा चुके है। अब केसी वेणुगोपाल और हरिप्रसाद इन पैनलों पर पर्यवेक्षकों के साथ वन टू-वन चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के दिग्गजों के बीच जारी कलह के मद्देनजर कई जगह एडजस्टमेंट के तौर पर भी जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जा सकती है ताकि कोई भी खेमा नाराज ना हो।
बाहरी राज्यों के कांग्रेस नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी
बताया जा रहा है कि पैनलों को शॉर्ट -लिस्ट करके उसमें 3-3 नाम रख इसके बाद फाइनल पैनल को राहुल गांधी के सामने रखा जाएगा और अंतिम फैसला जिला अध्यक्ष बनाने को लेकर राहुल गांधी ही करेंगे। विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी उम्मीद के विपरीत हर के बाद पार्टी हाईकमान और राहुल गांधी स्वयं संगठन में अबकी बार सीधे हस्तक्षेप कर रहे है और इसी का नतीजा है कि अबकी बार उन्होंने बाहरी राज्यों के कांग्रेस नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त कर जिलाध्यक्षों का पैनल तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी।
मेरिट के आधार पर नामों का पैनल तैयार होगा
इतना ही नहीं राहुल गांधी की तरफ से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि संगठन की नियुक्ति को लेकर हरियाणा कांग्रेस के किसी भी नेता के दबाव में केंद्रीय पर्यवेक्षक नहीं आएंगे और मेरिट के आधार पर नामों का पैनल तैयार होगा। गौरतलब है कि पिछले महीने राहुल गांधी द्वारा चंडीगढ़ आकर केंद्रीय व प्रदेश पर्यवेक्षकों के साथ बैठक के बाद नई दिल्ली में भी केंद्रीय पर्यवेक्षकों के संगठन खड़ा करने को लेकर मंत्रणा की। ये भी बता दें कि पर्यवेक्षकों ने जिलों में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करके जिलाध्यक्ष को लेकर फीडबैक लिया। इसी दौरान उन नेताओं से आवेदन लिए गए, जो जिलाध्यक्ष बनना चाहते थे और इसके लिए प्रदेशभर में 1100 से अधिक नेताओं ने इस पद के लिए आवेदन किया।
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