राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला ने कहा कि उन्होंने कहा कि आज मुख्य अतिथि के रूप में 76वें वन महोत्सव के अवसर पर आयोजित पौधारोपण समारोह में सम्मिलित होकर अपार हर्ष की अनुभूति हुई। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सशक्त पहल करते हुए जिला प्रशासन एवं वन विभाग, सिरसा द्वारा यह आयोजन न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत किया। पौधारोपण केवल एक पर्यावरणीय कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सौंपा जाने वाला एक जीवंत उपहार है। आइए, मिलकर यह संकल्प लें कि “एक वृक्ष लगाएँ, हरियाली बढ़ाएँ – स्वस्थ धरती, सुरक्षित भविष्य बनाएँ!”
मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाने होंगे
उन्होंने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण जैसे गंभीर समस्याओं के समाधान की दिशा में उठाए जा रहे छोटे-छोटे कदम बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। हमें समझना होगा कि अगर हम आज हरियाली को नहीं बचाएंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा और पानी सपना बन जाएगा। पर्यावरण संरक्षण किसी एक की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का कर्तव्य है। इसलिए हम सभी को मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाने होंगे और धरा को स्वच्छ व हरा भरा बनाना होगा।
विश्वविद्यालय परिसर में 2000 से ज्यादा पौधे लगाए गए
वे रविवार को सिरसा के चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित 76वें जिला स्तरीय वन महोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य अतिथि व उपस्थित गणमान्यों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में 2000 से ज्यादा पौधे लगाए गए। वहीं, वनों को बढ़ावा देने व उनके संरक्षण की जानकारी के साथ-साथ आमजन में जागरूकता पैदा करने के लिए मौके पर स्टॉल लगाकर नि:शुल्क पौधे बांटे गए। इसके अलावा जिला सिरसा को हरा भरा बनाने में सराहनीय योगदान देने वाले नागरिकों को भी सम्मानित किया गया।
यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं
मुख्य अतिथि ने कहा कि आज का यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह हमारी धरती माँ के प्रति हमारी जिम्मेदारी और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं जो न केवल पर्यावरण बचाने में मदद कर रही हैं, बल्कि आम जनता को भी इस अभियान में भागीदार बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एक पेड़ मां के नाम सिर्फ एक स्लोगन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सामाजिक आंदोलन है।
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