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The Haryana Story | डिफाल्टर सूचना अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में लोकायुक्त, अधिकारियों पर डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा जुर्माना राशि बकाया

डिफाल्टर सूचना अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में लोकायुक्त, अधिकारियों पर डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा जुर्माना राशि बकाया

लोकायुक्त ने जुर्माना राशि की बेहतर ढंग से वसूली के लिए लोकायुक्त ने मुख्य सूचना आयुक्त से सुझाव मांगे

प्रतीकात्मक तस्वीर

लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा ने मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद, जो कि हरियाणा के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रह चुके हैं, से वित्त विभाग में उनके अनुभव को देखते हुए उनसे आरटीआई एक्ट में जुर्माना राशि जमा न कराने वाले सूचना अधिकारियों से जुर्माना राशि वसूली के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। सूचना अधिकारियों पर कुल 1,71,83,833 रुपए जुर्माना राशि बकाया है। लोकायुक्त ने इस जुर्माना राशि जमा न कराने वाले डिफाल्टर सूचना अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है। जुर्माना राशि की बेहतर ढंग से वसूली के लिए लोकायुक्त ने मुख्य सूचना आयुक्त से सुझाव मांगे हैं। 

हर महीने सभी विभागों को वसूली गई जुर्माना राशि की मासिक रिपोर्ट सूचना आयोग को भी देनी होगी

जुर्माना राशि वसूली के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों ने लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा को सूचित किया कि जुर्माना राशि जमा न कराने वाले सभी 1953 डिफाल्टर जन सूचना अधिकारियों की सूची राज्य सूचना आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है। ताकि सीधे ही इनके वेतन से ही जुर्माना राशि की कटौती की जा सके। बकाया जुर्माना राशि डिफाल्टर जन सूचना अधिकारियों के वेतन से जल्द से जल्द वसूली के लिए सरकार ने सभी विभागों को कड़े आदेश दिये हैं और हर महीने सभी विभागों को वसूली गई जुर्माना राशि की मासिक रिपोर्ट सूचना आयोग को भी देनी होगी।

जुर्माना राशि जमा न कराने वाले इन डिफॉल्टर्स की सूची में कई एचसीएस अधिकारी भी शामिल

लोकायुक्त द्वारा इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। प्रदेश में सूचना का अधिकार के तहत अधिकारी-कर्मचारी एक तो सूचना नहीं दे रहे, ऊपर से जुर्माना भी नहीं जमा करवा रहे हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने पांच वर्ष पहले 21 जुलाई 2020 को लोकायुक्त कोर्ट में 1726 डिफाल्टर जन सूचना अधिकारियों से करीब 2.27 करोड़ रुपये की जुर्माना राशि वसूली के लिए केस दायर किया था।

जुर्माना राशि जमा न कराने वाले इन डिफॉल्टर्स की सूची में कई एचसीएस अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होने ने न तो समय से सूचना दी और न आयोग द्वारा लगाई गई जुर्माना राशि राजकोष में जमा कराई। लेकिन लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद राज्य सूचना आयोग और प्रदेश सरकार जुर्माना राशि वसूली के लिए गंभीरतापूर्वक सक्रिय हुए हैं। 

इन अधिकारियों पर करीब 10 साल से जुर्माना पेंडिंग

इसी कड़ी में ये सामने आया है कि इन अधिकारियों पर करीब 10 साल से जुर्माना पेंडिंग है। लेकिन अब मुख्य सचिव ने विभागों को विशेष सूचना अधिकारियों से जुर्माना की वसूली जल्द करने के निर्देश दिए हैं। वहीं उन्होनें राज्य सूचना आयोग को मासिक रिपोर्ट भी देने की बात कही है। मुख्य सचिव ने विभागों को कहा अगर किसी विभाग को वसूली में सहायता की आवश्यकता हो तो वे राज्य सूचना आयोग के रजिस्ट्रार से संपर्क कर सकते हैं।

बता दें कि डिफॉल्टर अधिकारियों पर पर 4 हजार से लेकर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना बकाया है। सबसे ज्यादा पंचायत विभाग के अधिकारियों ने जुर्माना राशि जमा नहीं कराई। जबकि स्थानीय शहरी और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर जुर्माना बाकी है। वहीं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, वन विभाग, एचएसवीपी, अर्बन एस्टेट, राजस्व, सेवा, परिवहन विभाग समेत कई विभागों के कई अधिकारियों ने अभी तक जुमार्ने की राशि जमा नहीं कराई है।

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