loader
The Haryana Story | धर्मांतरण पर कड़ी निगरानी : अब धर्म परिवर्तन से पहले उपायुक्त के पास प्रस्तुत करना होगा घोषणा पत्र

धर्मांतरण पर कड़ी निगरानी : अब धर्म परिवर्तन से पहले उपायुक्त के पास प्रस्तुत करना होगा घोषणा पत्र

हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निवारण अधिनियम एवं नियम, 2022 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश

हरियाणा के गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी उपायुक्तों, पुलिस आयुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निवारण अधिनियम एवं नियम, 2022 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन निवारण अधिनियम एवं नियम, 2022 के प्रावधानों के तहत धर्म परिवर्तन करने का इरादा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित उपायुक्त को प्रपत्र 'क' में एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा। जिन मामलों में धर्मांतरण किया जाने वाला युवा नाबालिग है, वहां माता-पिता या जीवित माता-पिता दोनों को प्रपत्र 'ख' में एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक है।

जिले के उपायुक्त को प्रपत्र 'ग' में पूर्व सूचना देनी होगी

इसके अतिरिक्त, किसी भी धार्मिक पुजारी या धर्मांतरण समारोह का आयोजन करने वाले व्यक्ति को उस जिले के उपायुक्त को प्रपत्र 'ग' में पूर्व सूचना देनी होगी जहां धर्मांतरण की योजना है। ऐसी घोषणाएं या सूचनाएं प्राप्त होने पर उपायुक्त एक रसीद जारी करके उनकी पावती देंगे जिससे धर्मांतरण प्रक्रिया का औपचारिक दस्तावेजीकरण और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसके अलावा, अधिनियम में यह प्रावधान है कि सूचना प्रदर्शित होने के 30 दिनों के भीतर, कोई भी व्यक्ति उपायुक्त के समक्ष लिखित आपत्ति दर्ज करवा सकता है। ऐसी आपत्तियां प्राप्त होने पर उपायुक्त को निर्धारित अनुसार गहन सत्यापन और जांच करने का अधिकार है।

धर्मांतरण की अनुमति देने से इनकार करने का अधिकार

यदि जांच के बाद, उपायुक्त पाते हैं कि प्रस्तावित धर्मांतरण अधिनियम का उल्लंघन है, जैसे कि बल प्रयोग, धोखाधड़ी, जबरदस्ती या अन्य निषिद्ध साधनों का प्रयोग तो जिला उपायुक्त को एक विस्तृत और तर्कसंगत आदेश जारी करके धर्मांतरण की अनुमति देने से इनकार करने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का उद्देश्य व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि नागरिकों को धोखे, जबरदस्ती या गैरकानूनी प्रलोभन से बचाना है। उन्होंने आगे बताया कि अधिनियम किसी भी व्यक्ति को गलत बयानी, बल प्रयोग, धमकी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन या कपटपूर्ण तरीकों (डिजिटल माध्यमों सहित) के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति का एक धर्म से दूसरे धर्म में धर्मांतरण करने या ऐसा करने का प्रयास करने से रोकता है।

गैरकानूनी धर्मांतरण के लिए 1 से 5 साल की कैद

यह विवाह द्वारा या विवाह के लिए धर्मांतरण पर भी प्रतिबंध लगाता है। प्रवक्ता ने बताया कि गैरकानूनी धर्मांतरण के लिए 1 से 5 साल की कैद और कम से कम 1 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति शादी करने के लिए अपना धर्म छिपाता है तो उसे 3 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति का धर्मांतरण करने पर 4 से 10 साल की कैद और कम से कम 3 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। 

शादी के लिए अपना धर्म छिपाने के प्रावधान का उल्लंघन करके किया गया कोई भी विवाह "अमान्य"

सामूहिक धर्मांतरण जिसे एक ही समय में 2 से ज्यादा लोगों के धर्मांतरण के रूप में परिभाषित किया गया है, के लिए 5 से 10 साल की कैद और कम से कम 4 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि शादी के लिए अपना धर्म छिपाने के प्रावधान का उल्लंघन करके किया गया कोई भी विवाह "अमान्य" माना जाएगा। हालांकि, प्रवक्ता ने आगे बताया कि ऐसे विवाह से पैदा हुआ कोई भी बच्चा वैध माना जाएगा और उसकी संपत्ति का उत्तराधिकार उसके माता-पिता के उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार होगा। 

Join The Conversation Opens in a new tab
×