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The Haryana Story | सेटेलाइट के आधार पर पराली जलाने के केस दर्ज कर लेती, तो क्या इस सरकार को खेतों में आई बाढ़ सेटेलाइड इमेज में नजर नहीं आती : हुड्डा

सेटेलाइट के आधार पर पराली जलाने के केस दर्ज कर लेती, तो क्या इस सरकार को खेतों में आई बाढ़ सेटेलाइड इमेज में नजर नहीं आती : हुड्डा

पोर्टल के जंजाल में फंसाने की बजाय बाढ़ पीड़ितों को 70,000 रु प्रति एकड़ मुआवजा दे सरकार: हुड्डा

जब सरकार को पराली जलाने के केस दर्ज करने होते हैं तो व सेटेलाइट के आधार पर फैसला ले लेती है। तो क्या इस सरकार को खेतों में आई बाढ़ सेटेलाइड इमेज में नजर नहीं आती? सरकार पोर्टल का चक्कर छोड़कर तुरंत स्पेशल गिरदावरी करवाए और किसानों तक आर्थिक मदद पहुंचाए। पोर्टल का झमेला सिर्फ किसानों को मुआवजे से वंचित करने का तरीका है। जिन गांवों में 100 प्रतिशत तक खराबा है, वहां के किसानों को भी पोर्टल पर रजिस्टर करने के लिए कहा जा रहा है। उक्त बातें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। जब लागत ₹30-35 हजार प्रति एकड़, सालाना पट्टा ₹70 हजार प्रति एकड़ है, तो ₹7-15 हजार का मुआवजा क्या किसानों से सरासर अन्याय और हरियाणा की खेती-किसानी को चौपट करने की साजिश नहीं है?

4 लाख किसानों ने बाकायदा पोर्टल पर खराबे की जानकारी अपलोड की

सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रही है। लोगों में बीजेपी सरकार के नकारेपन को लेकर भारी रोष है। बाढ़ के चलते हरियाणा में भयंकर तबाही मची है। किसानों 18 लाख एकड़ में खड़ी फसल बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी है। करीब 6000 गांव, 11 शहर और 72 कस्बे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 4 लाख किसानों ने बाकायदा पोर्टल पर खराबे की जानकारी अपलोड की है। जबकि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। हुड्डा विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद अपने आवास पर पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि इस बार हालात 1995 में आई बाढ़ से भी ज्यादा खराब हैं। उन्होंने यमुनानगर से लेकर रोहतक समेत कई इलाकों का दौरा किया और लोगों की समस्याएं सुनीं। 

बाढ़ को और ज्यादा भयावह बनाने के लिए अवैध खनन जिम्मेदार

उन्होंने बताया कि यमुना से लगते खेत तो तमाम फसलों व पोपलर समेत बह गए। खेत में खड़ी तमाम फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। गन्ने की फसल जड़ों से उखड़ गई हैं। धान समेत तमाम फसलें जलभराव की भेंट चढ़ चुकी हैं। खेतों में इतना रेत चढ़ चुका है कि अगले सीजन की फसल लेना भी नामुमकिन है। बाढ़ को और ज्यादा भयावह बनाने के लिए इलाके में हो रहा अवैध खनन जिम्मेदार है। सरकार के संरक्षण में खनन माफिया ने बेहिसाब अवैध खनन किया है जिससे यमुना का रुख ही बदल गया। एनजीटी से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इसको लेकर सरकार को आईना दिखाया है, लेकिन सरकार माफिया पर कार्रवाई करने की बजाए, संरक्षण दे रही है।

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