पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि जब मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से सरकार के पास पैदा होने वाली फसलों का पूरा विवरण क्षेत्रफल सहित आ जाता है तो उसे उसी हिसाब से डीएपी खाद का प्रबंध कर गांव में पैक्स पर ही वितरण करना चाहिए ताकि किसान को खाद के लिए शहर में आकर दिन-रात कतार में न लगना पड़े। आज हालात ये है कि प्रदेश में किसान गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद को लेकर धक्के खा रहा है जबकि कालाबाजारी में खाद आसानी से मिल रही है। सरकारी एजेंसी पर आधार कार्ड पर एक किसान को मात्र चार ही बैग खाद दी जा रही है बाकी खाद ब्लैक में खरीदने के लिए अधिकारी किसान को मजबूर कर रहे है। सरकार को जल्द से जल्द किसान हित में उचित कदम उठाना ही होगा।
दावा करने के बजाए धरातल पर उतरकर खाद का वितरण सुनिश्चित करना चाहिए
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि प्रदेश के हर जिला में डीएपी और यूरिया खाद की कमी को लेकर किसानों में भारी रोष है और वे सड़को पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कृषि मंत्री ने स्थिति को सामान्य बताते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करने और कालाबाजारी पर नजर रखने का दावा किया है। सरकार को दावा करने के बजाए धरातल पर उतरकर खाद का वितरण सुनिश्चित करना चाहिए। किसानों को खाद समय पर और उचित मात्रा में मिलनी चाहिए ताकि फसलें खराब न हों और वे भारी किल्लत के बीच लंबी कतारों में न खड़े हों।
किसानों को अपनी जरूरत की खाद ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही
अधिकतर जिलों में खाद की कालाबाजारी की शिकायतें आ रही है जिससे किसानों को अपनी जरूरत की खाद ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ रही है। खाद न मिलने के कारण किसान घंटों तक लाइनों में लगने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। रात को या सुबह से ही किसान कतार में लग जाते है इतना ही नहीं महिलाएं भी खाद के लिए सुबह से लाइन में लग जाती है। किसान एक ही बात कहता है कि समय पर खाद न मिलने से बिजाई प्रभावित होगी और फसलें खराब हो सकती हैं।
खाद कूपन न मिलने के कारण भी परेशानी हो रही
सांसद कुमारी सैलजा का कहना है कि किसानों को ज़रूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही है और वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। कुछ जिलों में किसानों को खाद कूपन न मिलने के कारण भी परेशानी हो रही है, जिससे विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जा रही है। पर्ची पर किसान का नाम और उसका आधार कार्ड लिखकर बाद में उसे एक पर्ची पर चार खाद के बैग दिए जाते है, आधार कार्ड पर खाद देने से पहले यह भी सुनिश्चित किया जाए कि उस व्यक्ति के नाम पर खेती है भी या नहीं।
किसानों को उनके ही गांव में पैक्स के माध्यम से खाद वितरित की जाए
सांसद ने कहा कि जब सरकार के पास किसान की फसल और जमीन का पूरा ब्यौरा है तो उसी हिसाब से खाद का प्रबंध करना चाहिए। किसानों को उनके ही गांव में पैक्स के माध्यम से खाद वितरित की जाए ताकि किसानों को खाद के लिए दिन रात शहर के चक्कर न लगाने पड़े। जिस किसान को 20 बैग खाद की जरूरत है उसका काम चार बैग खाद से तो चलने वाला ही नहीं है इससे तो लगता है कि सरकार गेहूं की बिजाई नहीं चाहती।
खाद की कालाबाजारी करने वालों पर अंकुश लगाना चाहिए
सांसद सैलजा का कहना है कि किसान रात से लाइन में लगा होता है और जब उसका नंबर आता है तो कहा जाता है कि खाद का स्टॉक ही खत्म हो गया है। सरकार को किसानों की परेशानी का ध्यान रखते हुए उनके ही गांव में खाद वितरण की व्यवस्था करनी चाहिए और खाद की कालाबाजारी करने वालों पर अंकुश लगाना चाहिए। इस वक्त किसानों को सबसे ज्यादा डीएपी खाद की जरूरत है, क्योंकि गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सांसद ने कहा कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी है।
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