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The Haryana Story | नया प्रदेशाध्यक्ष -पुरानी गुटबाज़ी : चुनौतीपूर्ण होगा भाजपा के प्रभाव को तोड़ना और कांग्रेस के भीतर की गुटबाज़ी को खत्म करना

नया प्रदेशाध्यक्ष -पुरानी गुटबाज़ी : चुनौतीपूर्ण होगा भाजपा के प्रभाव को तोड़ना और कांग्रेस के भीतर की गुटबाज़ी को खत्म करना

नए अध्यक्ष और तीन बार विधायक व कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे राव नरेंद्र के लिए यह जिम्मेदारी संभालते ही चुनौती बन गई

लम्बे समय के इंतज़ार कर बाद कांग्रेस ने हरियाणा में नया प्रदेशाध्यक्ष और सीएलपी लीडर घोषित कर दिया। लेकिन पार्टी की यह घोषणा होते ही संगठन में खींचतान और विरोध के स्वर तेज लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस ने हरियाणा में नया प्रदेशाध्यक्ष और सीएलपी लीडर घोषित कर दिया। लेकिन पार्टी की यह घोषणा होते ही संगठन में खींचतान और विरोध के स्वर तेज हो गए। नए अध्यक्ष और तीन बार विधायक व कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे राव नरेंद्र के लिए यह जिम्मेदारी संभालते ही चुनौती बन गई है। राव नरेंद्र सिंह ने दावा किया है कि चंडीगढ़ में होने वाले उनके शपथ ग्रहण समारोह में पूरी कांग्रेस एकजुट दिखेगी।

संपत सिंह और कुलदीप शर्मा जैसे नेताओं को मनाने का भरोसा जताया

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेता इसमें शामिल होंगे। साथ ही संपत सिंह और कुलदीप शर्मा जैसे नेताओं को मनाने का भरोसा भी जताया। हालांकि इसी बीच उन्होंने दो टूक संदेश दिया कि यह निर्णय आलाकमान का है, सबको स्वीकारना चाहिए। अगर कोई विरोध करता है तो इस्तीफा देकर जा सकता है। अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेशाध्यक्ष का पद संभालते ही राव नरेंद्र को कई मोर्चों से विरोध झेलना पड़ रहा है। इनेलो ने एक सीडी जारी कर उन्हें विवादों में घेरा, वहीं उनके अपने इलाके से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अजय यादव खुलकर मैदान में उतर आए। 

राव नरेंद्र को दोहरी लड़ाई लड़नी होगी

दूसरी ओर अहिरवाल, जो कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, अब भाजपा का मजबूत किला बन चुका है। यहां भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और अभय यादव का दबदबा है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि राव नरेंद्र को दोहरी लड़ाई लड़नी होगी एक ओर भाजपा के प्रभाव को तोड़ना और दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर हुड्डा, सुरजेवाला, सैलजा और बीरेंद्र सिंह जैसे दिग्गजों को साथ लेकर चलना।

हरियाणा कांग्रेस में यह राह आसान नहीं

गुटबाजी से जूझ रही हरियाणा कांग्रेस में यह राह आसान नहीं है। अहिरवाल में कांग्रेस की स्थिति फिलहाल कमजोर है। पूरे क्षेत्र में पार्टी के पास केवल एक सीट है। लोकसभा चुनाव में दादरी, बाढड़ा और लोहारू में जीत के बावजूद महेंद्रगढ़, नारनौल और अटेली में हार ने संगठन की कमजोरी उजागर कर दी। इसके इलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष उदयभान को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का डमी माना जाता था।

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