केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को भोपाल में सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान शिवराज सिंह ने पीएचडी, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की। यहां उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह दीक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है, क्योंकि ये दिन सिर्फ डिग्री लेने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी लेने का दिन है। आज से असली जीवन की परीक्षा शुरू होती है। जहां ज्ञान को कर्म में बदलना है, समाज और देश की सेवा में लगाना है। यहीं से तय होता है कि आपने जो सीखा है, वो सिर्फ किताबों तक सीमित रहेगा या जीवन और राष्ट्र निर्माण का साधन बनेगा। ये नवदीक्षा का पर्व है, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का क्षण है।
बड़ा सोचो, अच्छा सोचो, बड़े सपने देखो, एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जियो
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छात्र-छात्राओं से कहा कि बड़ा सोचो, अच्छा सोचो, बड़े सपने देखो, एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जियो। उन्होंने कहा कि जिंदगी के जिस भी मोड़ पर जरूरत होगी, इनोवेटिव आइडिया हो तो मेरे पास भेजना, मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा। यहां भोपाल में भी मामा का घर है और दिल्ली में भी मामा का घर है, मैं तुमसे दूर नहीं हूं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए राजनीति केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों की सेवा का माध्यम है। सार्थक और सफल मानव जीवन वही है जिसमें दूसरों की सेवा हो, क्योंकि मेरे लिए लोगों की सेवा ही भगवान की पूजा है।
महानिशा का अंत निकट है, जो अंधे हैं वो देख नहीं सकते
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के शब्द आज साकार हो रहे हैं। सवा सौ साल पहले स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि सुदीर्घ रजनी समाप्त हुई जान पड़ती है, महानिशा का अंत निकट है, जो अंधे हैं वो देख नहीं सकते, जो बहरे हैं वो सुन नहीं सकते, लेकिन मैं स्पष्ट रूप से देख रहा हूं कि भारत माता एक बार फिर से अंगड़ाई लेकर खड़ी हो रही है और विश्व गुरू के पद पर अधिष्ठित हो रही है। स्वामी विवेकानंद जी का नाम भी नरेन्द्र था, तो एक नरेन्द्र ने सवा सौ साल पहले कहा था और एक नरेन्द्र यानी कि प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी, इसे साकार कर रहे हैं। यह हमारी आंखों के सामने होगा, कोई रोक नहीं सकता।
अपने आप को दीनहीन मत मानना, मजबूर मत समझना
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अपने आप को दीनहीन मत मानना, मजबूर मत समझना, तुम सब कुछ कर सकते हो बस सोचो, करना क्या है..? साधारण जीवन मत जीना, बल्कि कुछ असाधारण करने की सोच रखना। कोई भी काम छोटा नहीं होता। अगर नौकरी करते हो तो ऐसे करो कि अलग पहचान बनाओ और अगर सोचो तो नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनो। आज खेती से लेकर इंजीनियरिंग तक हर क्षेत्र में संभावनाएं हैं। कई आईआईटी और आईआईएम के छात्र खेती में उतरकर प्रोग्रेसिव फार्मिंग कर रहे हैं। फूलों, फलों, औषधीय पौधों की खेती से नई दिशा दे रहे हैं। इसी तरह तकनीक के क्षेत्र में भी सोचो कि अपना काम कैसे शुरू कर सकते हो। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार क्षमता है, बस जरूरत है आत्मविश्वास और बड़े सपने देखने की।
शक्तिशाली भारत का निर्माण हो उसमें हमारा योगदान क्या हो सकता है..?
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज एक वैभवशाली, गौरवशाली, समृद्ध और शक्तिशाली भारत का निर्माण हो रहा हैं। अब सवाल यह है कि उसमें हमारा योगदान क्या हो सकता है..? हमारे हजारों महान क्रांतिकारी वंदे मातरम्, भारत माता की जय का उद्घोष करते हुए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़े थे, लेकिन आज देश के लिए जीने की जरूरत है और जीना है तो एक काम जरूर करना है।
अगर हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है तो देश में बनी चीज़े ही खरीदो। विदेशी वस्तुओं के मोह में मत पड़ो। यही सबसे आसान तरीका है देश की सेवा करने का। हमारी अर्थव्यवस्था में तुम बड़ा योगदान दे सकते हो, हमारे देश में कोई कंपनी बनाए उससे हमे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन देश में उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार भी बढ़ेगा और भारत की आर्थिक ताकत मजबूत होगी। केंद्रीय मंत्री ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि जीवन भर नशे से दूर रहना, नशा-नाश की जड़ है, ये जीवन तबाह और बर्बाद कर देता है।
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