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The Haryana Story | सांसद सैलजा ने लोकसभा में उठाया घग्गर नदी में बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा

सांसद सैलजा ने लोकसभा में उठाया घग्गर नदी में बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा

कहा- सिरसा, फतेहाबाद, कैथल और अंबाला जिलों में बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने लोकसभा में शुक्रवार को घग्घर नदी में बढ़ते प्रदूषण और इसके कारण तेजी से बढ़ रहे कैं सर, लीवर, किडनी रोग पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मांग की कि इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाए और समय समय पर जल की गुणवत्ता की जांच करवाते हुए प्रभावित जिलों में भाखड़ा नहर का पानी उपलब्ध करवाया जाए। सांसद कुमारी सैलजा ने शुक्रवार को लोकसभा में घग्गर नदी के बढ़ते प्रदूषण और इससे प्रभावित हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, कैथल और अंबाला जिलों के लाखों लोगों के सामने खड़ी गंभीर स्वास्थ्य आपदा का मुद्दा उठाया। सांसद ने कहा कि घग्गर नदी के जल में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

कैंसर और हैपेटाइटिस-सी का तेजी से बढ़ना गंभीर चिंता का विषय

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वर्ष 2023 के जल परीक्षण के अनुसार हरियाणा में टीडीएस 198 से 1068 एमजी/लीटर, पंजाब में टीडीएस 248 से 2010 एमजी /लीटर है। ये स्तर पीने योग्य तो दूर, सिंचाई के लिए भी पूरी तरह असुरक्षित हैं। इतना ही नहीं प्रभावित जिले और गांवों में कैंसर और हैपेटाइटिस-सी का तेजी से बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। घग्गर नदी के किनारे बसे कई गांवों में कैंसर, हैपेटाइटिस-सी, त्वचा रोग, किडनी रोग, तथा पाचन संबंधी गंभीर बीमारियों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की जा रही है। सांसद ने कहा कि सिरसा जिला में घग्गर नदी 169 किलोमीटर बहती है। इन गांवों में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। ओटू, रोड़ी, कुत्ताबढ़ और ऐलनाबाद क्षेत्र के कई गांव शामिल है। 

कई गांवों में कैंसर के केस राज्य की औसत दर से कई गुना अधिक पाए गए

प्रदूषित घग्गर का पानी न ता पीने योग्य है और न ही इसे सिंचाई योग्य माना जाता है क्योंकि भाखड़ा नहर का पेयजल आज तक उपलब्ध न होना, जिससे ग्रामीणों को भू-जल या नदी के आसपास के प्रदूषित जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। भू-जल में भारी धातुएं और रसायन पाए जाने के कारण कैंसर व लीवर रोगों में लगातार वृद्धि हो रही है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि फतेहाबाद जिला में घग्गर किनारे के कई गांवों में कैंसर के केस राज्य की औसत दर से कई गुना अधिक पाए गए हैं। गंदे नालों, उद्योगों और अनट्रिटिड सीवरेज के निरंतर प्रवाह को रोकने की कोई प्रभावी कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखती। इसी प्रकार कैथल जिला में घग्गर के आसपास के क्षेत्रों कलायत ब्लॉक व आसपास के दर्जनों गांवों में यहां भी प्रदूषित नदी के पानी तथा दूषित भू-जल के कारण त्वचा रोग, पेट के रोग और किडनी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।

सरकारी योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित

अंबाला जिला में घगर के पास के गांव मुलाना, सदौरा, नारायणगढ़ क्षेत्रों में कैंसर-पूर्व स्थितियों एवं हेपेटाइटिस-सी के कई केस सामने आ रहे हैं, जिनका सीधा संबंध दूषित जल स्रोतों से बताया जा रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि घग्घर नदी में प्रदूषण नियंत्रण करने वाली सरकारी योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित है, पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा स्थापित अधिकांश एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) या तो बंद पड़े हैं या क्षमता अनुसार काम नहीं करते। उद्योगों का अनट्रिटिड केमिकल वेस्ट अब भी सीधे घग्गर में बहाया जा रहा है। नदी संरक्षण योजना का अधिकतर कार्य सिर्फ फाइलों में है। 

सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे

सांसद ने सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत हस्तक्षेप करे और घग्गर नदी में प्रदूषण रोकने के लिए आपातकालीन कार्यवाही शुरू करे, सिरसा, फतेहाबाद, कैथल और अंबाला जिलों के प्रभावित गांवों में व्यापक जल गुणवत्ता सर्वे कराया जाए, पंजाब और हरियाणा के सभी एसटीपी की केंद्रीय एजेंसी द्वारा सीधे मॉनिटरिंग कराई जाए, नेशनल रिवर कंजरवेशन प्लान के तहत विशेष वित्तीय व तकनीकी पैकेज जारी किया जाए और सिरसा जिले के घघ्गर किनारे के गांवों को तुरंत ‘भाखड़ा नहर का पेयजल’ उपलब्ध कराया जाए, ताकि कैंसर व गंभीर बीमारियों के दुष्चक्र को रोका जा सके।

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