गुड़गांव जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसमें अरावली श्रृंखला की 100 मीटर से नीचे की चोटियों को संरक्षण के दायरे से बाहर करने की बात कही गई है। पंकज डावर के अनुसार इस फैसले के परिणाम अरावली और पर्यावरण के लिए घातक हो सकते हैं। डावर का मानना है कि इस फैसले से खनन माफिया और अवैध निर्माण करने वालों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अरावली दिल्ली-एनसीआर के लिए 'फेफड़ों' का काम करती है। यदि छोटी पहाड़ियों का संरक्षण खत्म हुआ, तो गुड़गांव में प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा और भूमिगत जल स्तर और नीचे चला जाएगा। वन्यजीवों को खतरा: संरक्षण हटने से वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास खत्म होने का डर है। कांग्रेस नेता ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और अरावली को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।
अरावली दिल्ली-एनसीआर के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच
अरावली श्रृंखला में 100 मीटर से नीचे की चोटियों को संरक्षण से बाहर करने के सुप्रीमकोर्ट के फैसले को लेकर कहा कि गुडगांव जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर ने कहा कि इस फैसले से अरावली पर संकट आ गया है। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अरावली दिल्ली-एनसीआर के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। अरावली की वजह से ही एयर पॉल्यूशन, जल की बचत और तापमान को सही रखने में मदद मिलती है। सुप्रीमकोर्ट को यह फैसला देशहित, जनहित और इंसानहित में बदलना चाहिए। पंकज डावर ने कहा कि सुप्रीमकोर्ट के इस फैसले के विरोध में पूरे देश में आवाज उठ रही है। अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो लाखों साल पहले बनी थी। गुजरात से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक करीब 800 किलोमीटर में अरावली श्रृंखला फैली हुई है।
गुडगांव की जनता के साथ धोखा
पंकज डावर ने कहा कि हरियाणा में भिवानी जिला के तोशाम और महेंद्रगढ़ जिला के मधोपुरा को मिलाकर सिर्फ दो ही अरावली की चोटियां 100 मीटर से ऊंची हैं। यानी बाकी की अरावली 100 मीटर से कम ऊंची है और सुप्रीमकोर्ट के फैसले के हिसाब से पूरी अरावली को खत्म कर दिया जाएगा। फैसले में कहा गया है कि अरावली इलाके में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अपने आप जंगल के तौर पर क्लासिफाई नहीं किया जा सकता। पंकज डावर ने कहा कि दो अक्टूबर 2025 को गुरुग्राम की धरती से ग्रीन अरावली अभियान चलाने वाले देश के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की बड़ी बातें आज बौनी साबित हो रही हैं। लोगों को अरावली बचाने के लिए रोज एक घंटा काम करने का आह्वान करने वाले मंत्री की बातें आज गुडगांव की जनता के साथ धोखा नजर आ रही हैं।
अरावली का अस्तित्व संकट में आ गया
राज्य स्तर पर वन्यजीव सप्ताह समारोह करने वाली हरियाणा की भाजपा सरकार 500 एकड़ में नमो वन में वृक्षारोपण अभियान शुरू किया था। नमो वन के नाम का ढोंग आज जनता के सामने आ गया है। जो भाजपा सरकार गुडगांव-नूंह जिला की जमीन पर जंगल सफारी बनाने का सपना लोगों को दिखाती आ रही है, उसी भाजपा सरकार में अरावली का अस्तित्व संकट में आ गया है। उन्होंने कहा, यह इतिहास में दर्ज है कि ब्रिटिश काल में दिल्ली को राजधानी इसलिए बनाया गया कि इसके एक तरफ अरावली और दूसरी तरफ यमुना नदी थी। यह प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती थी। भारत की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली लाने का मुख्य कारण भी यही था कि यहां पर्यावरण का फायदा था। सुप्रीमकोर्ट का जो फैसला अरावली के विरोध में आया है, वह भाजपा सरकार की ओर से सुप्रीमकोर्ट में कमजोर पैरवी के कारण हुआ है। जो अरावली अपनी हरियाली से हमें जीवनदान दे रही है, उसे मरुस्थल नहीं बनाया जा सकता।
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