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The Haryana Story | समालखा और बरवाला म्युनिसिपेलिटी के मौजूदा वास्तविक और आधिकारिक दर्जे पर असमंजस बरक़रार

समालखा और बरवाला म्युनिसिपेलिटी के मौजूदा वास्तविक और आधिकारिक दर्जे पर असमंजस बरक़रार

शहरी स्थानीय निकाय विभाग को कई बार लिखने बावजूद जवाब लंबित, 12 अगस्त 2025 को समालखा और 26 दिसम्बर 2025 को बरवाला को अधिसूचित किया गया नगर परिषद

हरियाणा में दो जिलों में स्थापित शहरी निकायों (म्युनिसिपेलिटी) के मौजूदा वास्तविक और आधिकारिक दर्जे पर असमंजस कायम है। प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल एवं विभाग के प्रशासनिक सचिव, महानिदेशक और आला अधिकारियों को बीते महीनों में कई बार लिखने बावजूद आज तक विभाग द्वारा इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। गत वर्ष 26 दिसम्बर को प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा प्रकाशित एक गजट नोटिफिकेशन मार्फ़त हिसार जिले में स्थापित बरवाला म्युनिसिपल कमेटी अर्थात नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर म्युनिसिपल कौंसिल अर्थात नगर परिषद कर दिया गया। उससे पूर्व बीते वर्ष 12 अगस्त 2025 को इसी प्रकार शहरी निकाय विभाग की एक अधिसूचना से पानीपत जिले में स्थापित समालखा म्युनिसिपल कमेटी अर्थात नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर भी म्युनिसिपल कौंसिल अर्थात नगर परिषद कर दिया गया था।

आज तक इस पर कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ

बहरहाल, इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने गत वर्ष हरियाणा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शहरी निकाय विभाग के मंत्री विपुल गोयल, विभाग के प्रशासनिक सचिव और महानिदेशक एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त को लिखकर समालखा और बरवाला नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद करने के विरूद्ध ज्ञापन भेजकर कानूनी आपत्ति दर्ज कराई हालांकि आज तक इस पर कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसी दौरान गत माह हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सदन द्वारा पारित हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 की प्रथम अनुसूची में हालांकि समालखा को नगर परिषद जबकि बरवाला को नगर पालिका के तौर पर दर्शाया गया। 

हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 में यह शब्द नहीं है

इसी बीच हेमंत ने बताया कि हिसार जिले के अंतर्गत वाली पड़ने मौजूदा बरवाला नगरपालिका समिति और पानीपत जिले के अंतर्गत पड़ने वाली समालखा नगरपालिका समिति दोनों को नगर परिषद के तौर पर अपग्रेड करने की टाइमिंग अर्थात समय पर गंभीर कानूनी सवाल उठता है चूँकि जून, 2022 में जब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश की 18 नगर परिषदों और 28 नगरपालिका समितियों के आम चुनाव कराये गए थे, तब उनमें बरवाला और समालखा दोनों नगरपालिका भी शामिल थीं एवं इन दोनों के चुनाव सम्पन्न होने पश्चात 4 जुलाई 2022 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बरवाला नगरपालिका समिति के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष रमेश कुमार और नगरपालिका क्षेत्र के सभी 19 वार्डो से निर्वाचित सदस्यों (जिन्हें आम तौर पर पार्षद या कौंसलर कहा जाता है हालांकि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 में यह शब्द नहीं है) और इसी प्रकार समालखा नगरपालिका समिति के प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष अशोक कुमार और नगरपालिका क्षेत्र के सभी 17 वार्डो से निर्वाचित सदस्यों के नामों की निर्वाचन नोटिफिकेशन प्रदेश के शासकीय गजट में प्रकाशित की गई थी। इस प्रकार मौजूदा बरवाला नगर पालिका सदन और समालखा नगर पालिका सदन दोनों का कार्यकाल जुलाई, 2027 तक शेष है। 

पूर्ववत निर्वाचित नगरपालिका समिति स्वत: भंग हो जायेगी

हेमंत ने आगे बताया कि हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 12 के अनुसार और भारत की संविधान के अनुच्छेद 243 यू(1) के अंतर्गत हर निर्वाचित नगर निकाय का कार्यकाल उसकी पहली आयोजित बैठक से पांच वर्ष तक होता है हालांकि उसे समयपूर्व कानूनन भंग किया जा सकता है। हरियाणा नगरपालिका कानून, 1973 की धारा 254 में मौजूदा निर्वाचित नगरपालिका को राज्य सरकार द्वारा कुछ विशेष और विकट परिस्थितियों में समय पूर्व भंग करने का प्रावधान तो है परन्तु उसमें ऐसा कहीं उल्लेख नहीं है कि अगर किसी निर्वाचित नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर प्रदेश सरकार द्वारा नगर परिषद किया जाता है, तो इससे पूर्ववत निर्वाचित नगरपालिका समिति स्वत: भंग हो जायेगी। वैसे भी किसी मौजूदा निर्वाचित नगर निकाय का दर्जा अपग्रेड करने मात्र से उस निकाय को भंग नहीं किया जा सकता है क्योंकि ऐसा करना पूर्णतया अलोकतांत्रिक होगा। इस प्रकार जब तक मौजूदा समालखा नगर पालिका समिति और मौजूदा बरवाला नगरपालिका समिति का पांच वर्ष कार्यकाल जुलाई, 2027 तक पूरा नहीं होता, तब तक उन दोनों को नगर परिषद के तौर पर अपग्रेड नहीं किया जा सकता है।

प्रथम आम चुनाव करना भी कानूनन आवश्यक होगा

यही नहीं 12 अगस्त 2025 को समालखा नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद करने और 26 दिसम्बर 2025 को बरवाला नगरपालिका समिति का दर्जा बढ़ाकर नगर परिषद करने के फलस्वरूप हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी कुछ महीनों में समालखा नगर परिषद और बरवाला नगर परिषद के प्रथम आम चुनाव करना भी कानूनन आवश्यक होगा, हालांकि अगर ऐसा किया गया तो वर्तमान निर्वाचित समालखा नगर पालिका समिति और बरवाला नगर पालिका समिति के पदाधिकारियो अर्थात उनके प्रत्यक्ष निर्वाचित अध्यक्ष और सभी वार्ड सदस्यों का पांच वर्ष कार्यकाल जो हालांकि जुलाई, 2027 तक शेष है, वह समयपूर्व समाप्त हो जाएगा जिसके विरूद्ध वह अदालत जा सकते हैं।

ऐसा जुलाई, 2027 के बाद ही प्रभावी किया जाना चाहिए

हेमंत ने बताया कि इसके साथ-साथ ध्यान में रखना आवश्यक है कि ऐसा संभव नहीं है की मौजूदा समालखा नगर पालिका समिति और बरवाला नगरपालिका समिति के वर्तमान 5 कार्यकाल के दौरान ही उन्हें नगर परिषद के अपग्रेड कर दिया जाए क्योंकि अगर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किसी नगर निकाय के म्युनिसिपल कमेटी अर्थात नगरपालिका समिति के तौर पर आम चुनाव कराये गये हैं, तो उसके पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले अथवा उसे किसी वैध कारण के असमय भंग करने से पहले न तो उसे अपग्रेड किया जा सकता है अर्थात न तो उसका दर्जा बढ़ाया जा सकता है और न ही डाउनग्रेड किया जा सकता है अर्थात न तो उसका दर्जा घटाया जा सकता है। हेमंत का कानूनी मत है कि अगर हरियाणा सरकार को समालखा नगर पालिका समिति और बरवाला नगर पालिका समिति का दर्जा अपग्रेड कर नगर परिषद करना ही है, तो ऐसा जुलाई, 2027 के बाद ही प्रभावी किया जाना चाहिए, उससे पहले नहीं क्योंकि ऐसा करने से दोनों नगरपालिका समितियों के निर्वाचित अध्यक्ष और वार्ड सदस्यों का 5 वर्ष कार्यकाल समय पूर्व समाप्त हो जाएगा जो पूर्णतः असंवैधानिक है.

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