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The Haryana Story | करनाल में धान घोटाले का पर्दाफाश, 7 करोड़ की हेराफेरी में 5 सरकारी अफसर गिरफ्तार

करनाल में धान घोटाले का पर्दाफाश, 7 करोड़ की हेराफेरी में 5 सरकारी अफसर गिरफ्तार

एसआईटी जांच में खुली परत-दर-परत साजिश

करनाल जिले में धान की सरकारी खरीद और भंडारण व्यवस्था में हुई बड़ी अनियमितताओं पर पुलिस ने सख्त शिकंजा कसते हुए बड़ा खुलासा किया है। धान घोटाले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग सरकारी एजेंसियों से जुड़े पांच अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में करीब 7 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी मीना ने बताया कि यह घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें सरकारी रिकॉर्ड, गेट पास और स्टॉक रजिस्टरों से छेड़छाड़ कर धान के फर्जी उठान और भंडारण को दिखाया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक साजिश का मामला है।

एसआईटी जांच में खुली परत-दर-परत साजिश

डीएसपी मीना ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 जनवरी 2026 को विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी ने मंडियों, राइस मिलों और वेयरहाउस से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की। रिकॉर्ड के मिलान में भारी विसंगतियां पाई गईं, जिसके बाद तकनीकी और भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में सामने आया कि कागजों में जिस मात्रा में धान का स्टॉक दर्शाया गया था, वह कई स्थानों पर वास्तविक रूप से मौजूद नहीं था। इसी आधार पर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हुई।

वेयरहाउस, हैफेड और खाद्य विभाग के अधिकारी गिरफ्त में

डीएसपी मीना ने बताया कि गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में हरियाणा वेयरहाउसिंग, हैफेड और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। सभी आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी धान की खरीद और उठान में फर्जीवाड़ा किया। पुलिस ने इनके खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

फर्जी गेट पास और कागजी स्टॉक से हुआ गबन

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी गेट पास जारी कर धान के उठान को वैध दिखाया। सरकारी रिकॉर्ड में पूरा स्टॉक दर्शाया गया, जबकि हकीकत में धान कई गोदामों और राइस मिलों से गायब था। लंबे समय तक फर्जी एंट्रियों के जरिए इस गबन को छुपाया गया। डीएसपी मीना ने बताया कि यह पूरा खेल विभागीय मिलीभगत के बिना संभव नहीं था।

सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान

पुलिस के अनुसार, इस घोटाले के कारण सरकार को करीब 7 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। जांच में यह भी सामने आया है कि नियमों और प्रक्रिया को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, ताकि गबन को अंजाम दिया जा सके।

कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी

डीएसपी मीना ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा और पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी। रिमांड के दौरान अन्य संदिग्धों की भूमिका, धन के लेन-देन और धान की रिकवरी को लेकर पूछताछ की जाएगी।

जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव

उन्होंने साफ किया कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत है। घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए जांच लगातार जारी है। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है।

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