भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि देश के सामने ऐसा विकट समय आ रहा है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह आवाज़ दिल्ली से निकलेगी और पूरे देश में गूंजेगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब किसानों का संघर्ष सिर्फ आंदोलन तक सीमित नहीं रहेगा। यह अब अपने अधिकार, अपने जीवन और अपने भविष्य को बचाने का संग्राम होगा। देश की राजधानी दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में भारतीय किसान यूनियन द्वारा आयोजित मुफ्त व्यापार समझौता ‘खतरे में खेती’ कार्यक्रम ने आज सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी। इस कार्यक्रम में देशभर से बड़ी संख्या में किसान नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद, विभिन्न राज्यों के विधायक और कई वरिष्ठ राजनीतिक चेहरे मौजूद रहे।
आने वाले बड़े टकराव की साफ तस्वीर पेश कर रही
इसी मंच से भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने ऐसा बयान दिया, जिसने कार्यक्रम को एक साधारण सम्मेलन से उठाकर किसानों के संभावित निर्णायक संघर्ष का ऐलान बना दिया। रतनमान ने मंच से बोलते हुए कहा कि आज इस गोष्ठी में बैठकर हमारे रोंगटे खड़े हो रहे हैं। कार्यक्रम में वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी ने सभा को और अधिक मजबूती दी। रतनमान ने टिकैत के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश का किसान उनकी ओर उम्मीद की नजर से देख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई ज्योतिषी नहीं हैं, लेकिन गांव-गांव की पंचायतों में किसानों की आंखों में जो गुस्सा, पीड़ा और बेचैनी दिखाई दे रही है, वह आने वाले बड़े टकराव की साफ तस्वीर पेश कर रही है।
यह समय बलिदान से पीछे हटने का नहीं
अपने संबोधन में रतनमान ने कहा कि यह समय बलिदान से पीछे हटने का नहीं है। अगर जरूरत पड़ी तो हजारों किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। यह राक्षसी दौर है और इस दौर में बिना कुर्बानी के किसानों का सम्मान और खेती का भविष्य नहीं बचाया जा सकता। सभा में मौजूद सांसदों, विधायकों और किसान नेताओं के बीच यह संदेश साफ तौर पर उभरकर सामने आया कि खेती आज गंभीर संकट में है और किसानों का सब्र जवाब दे चुका है।
किसानों के स्वाभिमान को नहीं बचाया, तो फिर हमारे जीने का भी कोई मतलब नहीं रह जाता
रतनमान ने भावुक होते हुए कहा कि अगर हमने अपने परिवारों, अपनी खेती और किसानों के स्वाभिमान को नहीं बचाया, तो फिर हमारे जीने का भी कोई मतलब नहीं रह जाता। संविधान क्लब में मौजूद जनप्रतिनिधियों और किसान संगठनों की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि खतरे में खेती अब सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि आने वाले समय में एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनने जा रहा है। इस कार्यक्रम में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, भाकियू नेता युद्धवीर सिंह, भाकियू बिहार प्रदेश अध्यक्ष दिनेश सिंह, सुमन सहाय, आप के राज्यसभा सांसद
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