बिहार से हरियाणा आकर ऑटो चलाने वाली बेबी देवी की कहानी नारी शक्ति और दृढ़ संकल्प की एक जीवंत मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी काम नामुमकिन नहीं है। उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा के सम्मान में कुछ पंक्तियाँ: "मंज़िलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।"
संघर्ष से सफलता का सफर
बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में अपनी पहचान बनाने वाली बेबी ने तब ऑटो चलाना शुरू किया जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। उन्होंने समाज की उन रूढ़ियों को तोड़ा जो मानती थीं कि भारी वाहन चलाना या सार्वजनिक सड़कों पर ऑटो चलाना केवल पुरुषों का काम है। बेबी देवी ने न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनीं कि वे स्वावलंबी बनें और अपनी मेहनत की कमाई से अपने बच्चों का भविष्य संवारें। वे मानती हैं कि "कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता" और यदि मन में लगन हो, तो महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं। आज वे न केवल एक ऑटो चालक हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी प्रतीक हैं जो दर्शाती हैं कि एक महिला की हिम्मत के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं।
कोई भी कठिन से कठिन काम ऐसा नहीं है जिसको महिलाएं न कर सकती हों
बिहार से आकर हरियाणा में ऑटो चलाने वाली बिहार की बेबी नामक महिला ने अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए अपने आपको इस तरह से प्रस्तुत किया है कि कोई भी कठिन से कठिन काम ऐसा नहीं है जिसको महिलाएं न कर सकती हों। बिहार से आकर पानीपत से समालखा में ऑटो चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाली बेबी जो श्री श्याम बाबा मंदिर के लिए बाबा के भक्तों को ऑटो में लेकर आती हैं और वह अपनी रोजी-रोटी का साधन कमा रही है, वह पुरुषों की तरह निडरता और ईमानदारी से इस कार्य को कर रही हैं। श्री श्याम बाबा मंदिर में जाने के लिए सावरिया भरे हुए सड़क पर खड़ी ऑटो ड्राइवर महिला ड्राइवर ने बताया कि वह बिहार की रहने वाली है और करीब 8 से 10 वर्षों पहले पानीपत में आई थी और अब वह पानीपत से समालखा खंड के चुलकाना श्री श्याम बाबा मंदिर तक ऑटो चलाने का काम कर रही है।
उसके अंदर महिला होने की कोई भी झिझक नहीं
कुल मिलाकर उसने बताया कि उसके अंदर महिला होने की कोई भी झिझक नहीं है, वह निडर होकर अकेली अपना ऑटो लेकर चलती हैं और उसमें चाहे एक सवारी हो या चाहे आठ सवारी हो, वह यह नहीं मानती कि उसके ऑटो में केवल महिला ही सवारी करेगी, उसने कहा कि उसके ऑटो में कोई पुरुष बैठे या महिला वह तो बेझिझक और निडर होकर अपना कार्य कर रही हैं,उसने बताया कि बिहार में तो उसने जन्म लिया और हरियाणा प्रदेश उसकी कर्मभूमि है और कर्म भूमि में अब श्री श्याम बाबा की नगरी उसको विशेष तौर से भा रही है, क्योंकि वह पानीपत से समालखा में अपना ऑटो लेकर आती है और वह श्याम बाबा की असीम कृपा मान रही है कि वह सवारियों को निरंतर उसको पानीपत से समालखा और समालखा से पानीपत ले जाती हैं।
सशक्तिकरण की मिसाल
कुल मिलाकर वह अपने परिवार का पालन पोषण कर रही हैं, उसने यह भी कहा कि अगर महिलाएं निडर होकर किसी भी कार्य को करें तो वह पुरुषों की बराबरी कर सकती हैं। महिला ड्राइवर बेबी ने यह भी कहा कि जिस तरह से मैं काम कर रही हूं, अन्य महिलाएं भी इसी तरह से केवल ऑटो चलाना नहीं अन्य ऐसे भी कार्य हैं, कि लोगों के मन में एक धारणा है कि यह कार्य तो केवल पुरुष ही कर सकते हैं, लेकिन यह गलत है, क्योंकि महिलाएं जब हर कार्य को करने के लिए अपने मन में लग्न पैदा करेंगे तो वह कठिन से कठिन काम को भी आसान बनाकर आत्मनिर्भर बन सकती है।
महिला ड्राइवर बच्चे ने समालखा और जिला प्रशासन का भी आभार जताया है, क्योंकि जब मैं ऑटो चलाना शुरु किया तो मुझे बार-बार ताने दिए जाते थे कि पुलिस प्रशासन परेशान करेगा और अन्य प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी भी परेशान कर सकते हैं, लेकिन मुझे आज करीब 5-6 साल हो गए हैं कि ऑटो चलाने का काम कर रही हूं, लेकिन आज तक प्रशासन की ओर से मुझे किसी के द्वारा परेशान करना तो दूर मुझे टोका तक नहीं है।
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