प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशव्यापी प्राकृतिक खेती की मुहिम को हरियाणा में हर-घर तक पहुंचाने के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने अब बीड़ा उठा लिया है। इस अभियान को मूर्त रूप देने के लिए देशभर में जहरमुक्त खेती के अग्रदूत कहलाने वाले गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत 21 अप्रैल को भिवानी स्थित हरियाणा बोर्ड परिसर में प्रदेश के 10 हजार स्कूलों के शिक्षकों व पंचायत सदस्यों को संबोधित करेंगे। आचार्य देवव्रत लंबे समय से देशभर में रासायनिक मुक्त खेती का प्रचार कर रहे हैं और अब उनके मार्गदर्शन में हरियाणा के शिक्षक इस ज्ञान को ग्रामीण इलाकों तक पहुँचाएंगे।
देश में अपनी तरह का पहला बड़ा आयोजन
बोर्ड अध्यक्ष डॉ पवन कुमार ने बताया कि हरियाणा शिक्षा बोर्ड परिसर में होने वाला कार्यक्रम एक अनोखा कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 10 हजार से ज्यादा स्कूली शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। जिन गांवों से स्कूलों के शिक्षक आमंत्रित किए गए हैं, उन गांवों के पंचायत सदस्यों को भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए न्यौता दिया जाएगा।
इस प्रकार का कार्यक्रम देश में इतने बड़े स्तर पर पहली बार आयोजित किया जाएगा। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) अब प्रदेश की नई पीढ़ी को 'जहरमुक्त खेती' के गुर सिखाने की तैयारी कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक खेती के मिशन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए बोर्ड ने एक विशाल मुहिम शुरू की है। इस अभियान के तहत 21 अप्रैल को भिवानी स्थित शिक्षा बोर्ड परिसर में एक भव्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
शिक्षक बनेंगे 'परिवर्तन के दूत'
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम अपने आप में अनूठा है। देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर शिक्षा विभाग और पंचायतों को जोड़कर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों से शिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। जिन गांवों से शिक्षक आएंगे, वहां के पंचायत सदस्यों को भी न्यौता दिया जा रहा है ताकि स्कूल और समाज मिलकर इस मुहिम को सफल बनाएं।
क्यों जरूरी है यह मुहिम?
बोर्ड की योजना है कि प्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों में बच्चों को प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में बताएंगे। जब बच्चे इस जहरमुक्त पद्धति के बारे में जानेंगे, तो वे अपने अभिभावकों और आसपास के किसानों को जागरूक करेंगे। शिक्षकों के साथ पंचायतों के जुड़ने से यह अभियान सीधे खेतों और किसानों के चूल्हे तक पहुँचेगा। वर्तमान में रसायनों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से जमीन की ऊर्वरक शक्ति कम हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। हरियाणा शिक्षा बोर्ड का यह कदम न केवल पर्यावरण के संरक्षण में मददगार साबित होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जीवन और शुद्ध खान-पान के प्रति जागरूक भी करेगा।
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