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The Haryana Story | मिसाल-ए-दोस्ती : दोस्त के खातिर सड़कों पर उतरा जर्मनी का साइंटिस्ट, वजह जानकर आप भी करेंगे सलाम !!

मिसाल-ए-दोस्ती : दोस्त के खातिर सड़कों पर उतरा जर्मनी का साइंटिस्ट, वजह जानकर आप भी करेंगे सलाम !!

दोस्त के बुरे वक्त में मसीहा बना अवधेश, लग्जरी कार की डिग्गी में शुरू किया 'दोस्ती का स्टार्टअप' गुरुग्राम

कहते हैं कि सच्चा दोस्त वही है जो मुश्किल वक्त में काम आए, लेकिन गुरुग्राम के सेक्टर-31 मार्केट में इन दिनों दोस्ती की एक ऐसी मिसाल देखने को मिल रही है जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। यहाँ जर्मनी से लौटे एक मेडिकल रिसर्च साइंटिस्ट, अवधेश, अपने बेरोजगार दोस्त की मदद के लिए अपनी लग्जरी कार में डोनट और बेकरी प्रोडक्ट्स बेच रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

अवधेश के दोस्त रजत की हाल ही में नौकरी छूट गई थी। आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण रजत काफी परेशान थे। जब यह बात जर्मनी में मेडिकल रिसर्च कर रहे अवधेश को पता चली, तो उन्होंने अपने दोस्त को अकेला नहीं छोड़ा। अवधेश न केवल भारत लौटे, बल्कि उन्होंने दोस्त को आर्थिक रूप से खड़ा करने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना। 

37 लाख की लग्जरी कार बनी 'चटकारा ऑन व्हील्स'

अवधेश ने अपनी 37 लाख रुपये की लग्जरी कार को ही स्टॉल बना दिया और नाम दिया ‘चटकारा ऑन व्हील्स’। गुरुग्राम के सेक्टर-31 की मार्केट में खड़ी इस कार की डिग्गी से अब इटालियन बॉम्बोलोनी डोनट्स और अन्य बेकरी आइटम्स बेचे जा रहे हैं। एक साइंटिस्ट को इस तरह सड़क पर स्टॉल लगाते देख हर कोई हैरान है, लेकिन जब इसके पीछे की कहानी सामने आई, तो लोग तारीफ करते नहीं थक रहे। 

"जब तक दोस्त सेट नहीं होगा, जर्मनी नहीं जाऊंगा"

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस 'दोस्ती के स्टार्टअप' ने सबको भावुक कर दिया है। अवधेश का कहना है कि पैसा और करियर अपनी जगह है, लेकिन दोस्त की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने बड़ा बयान देते हुए कहा, "जब तक मेरा दोस्त रजत पूरी तरह सेट नहीं हो जाता और यह काम जम नहीं जाता, तब तक मैं जर्मनी वापस नहीं जाऊंगा।" 

लोगों का मिल रहा है भरपूर समर्थन

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद 'चटकारा ऑन व्हील्स' पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग न सिर्फ स्वादिष्ट डोनट्स का लुत्फ उठा रहे हैं, बल्कि अवधेश के इस जज्बे को सलाम भी कर रहे हैं। युवाओं के लिए यह एक बड़ी सीख है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और दोस्ती में अहंकार की कोई जगह नहीं होती। मुश्किल वक्त में दोस्त की ताकत बने अवधेश ने साबित कर दिया है कि दुनिया में आज भी सच्ची दोस्ती जिंदा है।

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