हरियाणा में गिरते भूजल की स्थिति बेहद चिंताजनक है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 1,780 से अधिक गांव अब 'रेड जोन' में आ चुके हैं। इन क्षेत्रों में जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, उसकी तुलना में प्राकृतिक रिचार्ज बहुत कम है। कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल और पानीपत जैसे धान बहुल जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहाँ जलस्तर सैकड़ों फीट नीचे जा चुका है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने 'मेरा पानी-मेरी विरासत' जैसी योजनाएं शुरू की हैं, ताकि किसानों को धान के बजाय कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा सके।
प्रदेश में अब 30 प्रतिशत से ज्यादा गांव अब रेड जोन में
हरियाणा की गिरते भूजल स्तर की खराब स्थिति का अंदाजा सहज ही इस पहलू से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अब 30 प्रतिशत से ज्यादा गांव अब रेड जोन में हैं, जहां पानी निकालने का लेवल रिचार्ज से कहीं ज्यादा है, इसलिए अब खतरे के निशान साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। पिछले कुछ सालों में गिरते भूजल स्तर वाले डार्क जोन वाले ब्लॉक की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है क्योंकि साल 2020 में डार्क जोन ब्लॉक जहां 85 थे अब इनकी संख्या बढ़कर 91 हो चुकी है जो कि बेहद चिंतनीय है। दशकों से धान-गेंहू की खेती पर निर्भरता, जो मुफ्त या सब्सिडी वाली बिजली से बनी हुई है, ने ग्राउंडवाटर की अंधाधुंध पंपिंग को बढ़ावा दिया है। जल शक्ति मंत्रालय के अधीन आने वाले केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवंबर 2025 की रिपोर्ट हरियाणा के लिए एक कड़ा चेतावनी संकेत है।
डार्क जोन ब्लॉक की संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ रही
रिपोर्ट के अनुसार कुल 22 में से प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां भूजल में नाइट्रेट की मात्रा तय मानकों के भीतर हो। कई इलाकों में फ्लोराइड, आसेर्निक, यूरेनियम और ईसी यानी विद्युत चालकता की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है. ये स्थिति बताती है कि समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई है। निरंतर बढ़ रही है डार्क जोन ब्लॉक की संख्या हरियाणा में डार्क जोन ब्लॉक की संख्या पिछले कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है।
जारी विधानसभा सत्र में सदन में रखे गए आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में डार्क जोन ब्लॉक की संख्या 85, 2022 में 88, 2023 में भी 88 और 2024 में भी 88 ही रही लेकिन साल 2025 में ये आंकड़ा बढ़कर 91 हो गया जो स्थिति की भयावहता को दर्शाता है। वहीं क्रिटिकल ब्लॉक की बात करें तो साल 2020 में इनकी संख्या 12 थी जो साल 2025 में घटकर 6 रह गई। चूंकि डार्क जोन की संख्या बढ़ी है तो वाजिब है कि पूर्व में जो वाटर जोन क्रिटिकल थे वो अब ज्यादा भूजल स्तर गिरने के चलते डार्क जोन कैटेगरी में परिवर्तित हो चुके हैं।
हरियाणा में वर्तमान में 35 लाख करोड़ लीटर पानी की मांग
वहीं सेमी क्रिटिकल वॉटर ब्लॉक की बात करें तो साल 2020 में इनकी संख्या 14 थी जो 2022 में 9, 2023 में 9, 2024 में 9 और 2025 में बढ़कर 15 हो गई। इनके अलावा सुरक्षित वाटर वॉटर जोन की बात करें तो 2020 में इनकी संख्या 2020 में 30 थी जो बढ़कर 36 हो गई लेकिन 2023 और 2024 में घटकर दोनों साल 35 और 2025 में तो महज 31 ही रह गई। हर साल करीब 14 लाख लीटर पानी की कमी राज्य में आंकड़ों के लिहाज से अनुमानित तौर पर हरियाणा में वर्तमान में 35 लाख करोड़ लीटर पानी की मांग के विपरीत सिर्फ 21 लाख करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति हो पा रही है।
राज्य के कई जिलों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया
यानी कि हर वर्ष करीब 14 लाख करोड़ लीटर पानी की कमी रहती है। लगातार ज्यादा पानी की खपत वाली फसल खासकर जीरी और गिरते भूजल स्तर ऐसी स्थिति बनी है। राज्य के कई जिलों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। राज्य के तीन दर्जन से अधिक ब्लाक डार्क जोन में आ चुके हैं, जहां पानी 200 से 500 फुट नीचे तक मिल पा रहा है। इसके अलावा पड़ोसी राज्य पंजाब के साथ भाखड़ा नहर के पानी में हिस्से को लेकर जारी विवाद का समाधान होने के चलते भी समस्या जस की तस बनी हुई है। नतीजतन हरियाणा को आवंटित 9500 क्यूसेक पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है।
फ्लोराइड के कारण हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और नसों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही
हालांकि पानी की बचत के लिए सरकार ने धान की फसल के स्थान पर अन्य फसलें उगाने (क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) वाले किसानों को सात से नौ हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया ह लेकिन जीरी की खेती कर रहे किसानों को इसके जरिए प्रोत्साहित कर पाना इतना आसान भी नहीं है क्योंकि जारी की फसल में प्रति एक ड़ इनकम अन्य फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के मुताबिक हरियाणा के 20 जिलों के 136 गांव ऐसे हैं। जहां भूजल में फ्लोराइड की मात्रा बहुत अधिक पाई गई है। भिवानी के लोहारवाला गांव में फ्लोराइड का स्तर 22 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज हुआ, जो सामान्य से करीब 15 गुना ज्यादा है। पानीपत के अटावला और जींद के उचाना जैसे इलाकों में भी यही स्थिति है, जहां फ्लोराइड के कारण हड्डियों की कमजोरी, जोड़ों में दर्द और नसों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।
अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड वाला पानी पीने योग्य नहीं होता। साल 2004 से पहले, डार्क जोन शब्द का इस्तेमाल होता था और उस ब्लॉक को डार्क जोन कैटेगरी में रखा जाता था जहां ग्राउंड वॉटर डेवलपमेंट का स्टेज (रडऊ) 85% से ज्यादा था। ग्राउंड वॉटर डेवलपमेंटका स्टेज सालाना ग्राउंड वॉटर ड्राफ्ट और सालाना ग्राउंड वॉटर की उपलब्धता का रेश्यो है। अब 2004 से उन ब्लॉक के लिए ओवर-एक्सप्लोइटेड, क्रिटिकल, सेमी-क्रिटिकल और सेफ शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है जहाँ ग्राउंड वॉटर डेवलपमेंट का स्टेज क्रमश: 100%, 90-100%, 70-90% और 70% से ज्यादा है। साल 2022 से ग्राउंड वॉटर रिसोर्स का एस्टिमेशन हर साल ग्राउंड वॉटर सेल, इरिगेशन और वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट, हरियाणा द्वारा सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड, चंडीगढ़, भारत सरकार के साथ कोऑर्डिनेशन में किया जाता है
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