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The Haryana Story | गाय के गोबर से बनाई अनूठी चीज़ें : देखने और खरीदने वाले हैरान

गाय के गोबर से बनाई अनूठी चीज़ें : देखने और खरीदने वाले हैरान

संघ की प्रतिनिधि सभा के बैठक स्थल पर जैविक खेती के तरीके, बीज और कपड़े की लगाई गई प्रदर्शनी, पारंपरिक खेती को बचाने का अनूठा अभियान

हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक चल रही है। इस बैठक के स्थल पर देश भर से आए लगभग डेढ हजार प्रतिनिधियों के लिए विभिन्न प्रकार के सामान, पुस्तकों एवं तकनीकों को प्रदर्शित करने वाली स्टॉल्स लगाई गई हैं। इस स्थल पर पर्यावरण और जीवन को बचाने वाले एक प्रयास को दर्शाने वाली एक स्टॉल खेती विरासत मिशन नामक संस्था द्वारा लगाई गई है। इस स्टॉल के माध्यम से खेती के पारंपरिक भारतीय तौर तरीकों को फिर से अपनाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है, इसमें किस प्रकार की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से किस प्रकार की फसल या वनस्पति लगाया जाना उचित है, इसकी पूरे वैज्ञानिक तरीके जांच करके जानकारी दी जाती है, साथ ही पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से तैयार विभिन्न प्रकार के बीज भी उपलब्ध करवाए जाते हैं।

प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आवश्यकता पूरी दुनिया में अनुभव की जा रही

वर्तमान में जब पूरी मनुष्य जाति विज्ञान के अत्यधिक हस्तक्षेप एवं स्वयं के लालच के कारण निरंतर जहरीले खाद्य पदार्थों का सेवन कर रही है, ऐसे समय में प्राकृतिक एवं जैविक खेती की आवश्यकता पूरी दुनिया में अनुभव की जा रही है। खेती की फसल की अधिक पैदावार प्राप्त करने के लालच और फसलों को कीट-कृमियों से बचाने के लिए खेती में रसायनों का प्रयोग जानलेवा स्तर तक बढ़ गया है, इससे ना केवल मनुष्य का जीवन खतरे में आता है बल्कि पशुओं को भी अनेक बीमारियां होती हैं। यहां तक इस प्रकार की वनस्पति को खाने वाले पशुओं से प्राप्त दूध एवं अन्य सामग्री भी हानिकारक होती जा रही है। इस परिदृश्य में प्राकृतिक खेती के तौर-तरीकों के प्रचार प्रसार के लिए “खेती विरासत मिशन” महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

मिशन ने अपने कार्यक्षेत्र पंजाब में उल्लेखनीय काम किया

मिशन के लोग ना सिर्फ खाद्य पदार्थों वाली फसलों के प्राकृतिक उत्पादन के लिए काम कर रहे हैं, बल्कि देसी कपास की खेती के लिए भी लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। माधव सृष्टि में लगी स्टॉल पर इस देसी कपास से बनी शुद्ध देसी खादी के कपड़े भी प्रदर्शित किए गए हैं। इस प्रकार की खादी के वस्त्रों के निर्माण के लिए भी मिशन ने अपने कार्यक्षेत्र पंजाब में उल्लेखनीय काम किया है और सैकड़ों पारंपरिक वस्त्र निर्माता बुनकरों को इसके लिए जोड़ा है। इस प्रकार से प्राप्त खादी और वस्त्र मानव शरीर को हानि नहीं पहुंचाते, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल होने कारण लाभदायक सिद्ध होते हैं। मिशन जैविक खेती के प्रमाणन का भी कार्य करता है साथ ही किसानों के प्रशिक्षण तथा अन्य लोगों को घरों में छोटे किचन गार्डन बनाने में मदद करता है।

गाय के गोबर से बनाई गई चीजों को बहुत अच्छे चाव से खरीदा

इन जानकारियों से बैठक में देश भरे से आए प्रतिनिधि भी लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान में जब पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां निरंतर बढ़ती जा रही हैं तब “खेती विरासत मिशन” की यह पहल निश्चित ही प्रेरणादायी एवं परिवर्तनकारी है। हालांकि यहां पर गाय के गोबर को भी भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार बताते हुए खेती विरासत मिशन के द्वारा कहा गया कि गाय का गोबर कचरा नहीं बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को बनाने का एक माध्यम है, क्योंकि गाय के गोबर से काफी ऐसी चीज बनाई जा सकती हैं, जिसको लेकर देखने और खरीदने वाले हैरान रहते हैं। यहां पर गाय के गोबर से बनाई हुई काफी चीजों को भी प्रदर्शित किया गया, देश वर्ष है लोगों ने गाय के गोबर से बनाई गई चीजों को बहुत अच्छे चाव से खरीदा।

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