हरियाणा के पानीपत में एक बेहद भावुक कर देने वाकया सामने आया, जिसमें एक ऐसी बेटी, जो बोल नहीं सकती थी और जिसके सिर से पिता का साया भी उठ चुका था, को उसकी मां ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले जन सेवा दल के “अपना आशियाना”, पानीपत में सुरक्षित रखने का निर्णय लिया था। चूंकि मां परिवार का पालन-पोषण करने के लिए स्वयं रोज़गार के लिए बाहर जाती थी और उसे हर पल यही चिंता सताती थी कि उसकी मासूम बेटी घर पर कैसे अकेली रहेगी तो कहीं कोई अनहोनी न हो जाए।
अच्छाई कभी खत्म नहीं होती
यह सुनकर वाकई दिल को सुकून मिलता है। पानीपत का जन सेवा दल निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल है। जब लोग अपनी सुख-सुविधाओं से ऊपर उठकर दूसरों के दुख और तकलीफ को अपना समझने लगते हैं, तभी समाज में इंसानियत की नींव मजबूत होती है। चाहे लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार करना हो, बीमारों की मदद करनी हो या गरीबों तक भोजन पहुँचाना—इस दल के सेवादारों का जज्बा यह साबित करता है कि अच्छाई कभी खत्म नहीं होती। ऐसे ही प्रयासों से दुनिया रहने लायक एक बेहतर जगह बनती है।
बेटी को सिर्फ आश्रय ही नहीं, बल्कि सच्चा परिवार मिला
अपना आशियाना” में इस बेटी को सिर्फ आश्रय ही नहीं, बल्कि सच्चा परिवार मिला। सेवादारों ने उसे अपार स्नेह, देखभाल और सुरक्षा प्रदान की। उसके चेहरे की मुस्कान और आंखों की चमक इस बात का प्रमाण थी कि उसे यहां अपनों जैसा प्यार मिला। आज जब उसकी मां उसे वापस अपने घर ले जाने के लिए आई, तो वह पल अत्यंत भावुक कर देने वाला था। बेटी की आंखों में खुशी के आंसू थे—एक तरफ मां के साथ घर लौटने की खुशी, तो दूसरी तरफ उन लोगों से बिछड़ने का दर्द, जिन्होंने उसे इतने समय तक अपना समझकर संभाला।
बेटी को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि उसे अपनों जैसा प्यार भी दिया
मां ने जन सेवा दल “अपना आशियाना” के सभी सेवादारों का दिल से आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने उसकी बेटी को न केवल सुरक्षित रखा, बल्कि उसे अपनों जैसा प्यार भी दिया। यह संस्था समाज में मानवता, सेवा और करुणा की सच्ची मिसाल बनकर उभर रही है। जन सेवा दल अपना आशियाना के प्रधान कमल गुलाटी व सचिव चमन गुलाटी का कहना है बेटियां सबकी सांझी होती है बिन बाप की बेटी का हमने अपने बेटी समझ कर इसका पालन पोषण किया हमारी प्रशासन से एक और प्रार्थना है इस आश्रम में 240 गज की जगह में 60 प्रभु की सजीवित मूर्तियां रहती हैं जिसमें लगभग 28 लेडिस और 32 जेंट्स हैं इनके लिए कोई बड़ी जगह का प्रबंध किया जाए जिससे इनका पालन पोषण अच्छी तरह हो सके।