करनाल के कुरलन गांव की अनु जून आज अपनी मेहनत और हौसले के दम पर “लड्डू वाली” के नाम से देश ही नहीं, विदेशों तक पहचान बना चुकी हैं। शून्य से शुरू हुआ उनका सफर आज लाखों के टर्नओवर वाले सफल स्टार्टअप में बदल चुका है। उनकी कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।
हादसे ने बदली जिंदगी, हिम्मत से लिखी नई कहानी
अनु बताती हैं कि पहले वह कपड़ों का होलसेल कारोबार करती थीं और अच्छी आमदनी हो रही थी। लेकिन करीब चार साल पहले उनके पति का गंभीर सड़क हादसा हो गया। इलाज में 35-40 लाख रुपये खर्च हो गए, जिससे परिवार आर्थिक संकट में आ गया। इस मुश्किल दौर ने जहां परिवार को झकझोर दिया, वहीं अनु के लिए नई शुरुआत का रास्ता भी खोल दिया।
बिना निवेश के शुरू किया काम
आर्थिक तंगी के बीच अनु ने हार नहीं मानी। कुकिंग के शौक और बचपन से सीखे पारंपरिक हुनर को आधार बनाकर उन्होंने घर से ही लड्डू बनाने का काम शुरू किया। बिना किसी पूंजी के उन्होंने सोशल मीडिया ग्रुप में पोस्ट डालकर शुरुआत की, जहां से उन्हें पहला ऑर्डर मिला और उसी से उनका सफर आगे बढ़ता गया।
महीने में 2 लाख तक पहुंची कमाई
शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और गुणवत्ता के दम पर उनका काम तेजी से बढ़ा। आज उनका स्टार्टअप हर महीने करीब 2 लाख रुपये तक की आमदनी कर रहा है। अलग-अलग शहरों और राज्यों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं।
‘एमजे शुद्ध रसोई’ बना पहचान
अनु ने अपने काम को आगे बढ़ाते हुए “एमजे शुद्ध रसोई” के नाम से स्टार्टअप शुरू किया। सभी जरूरी लाइसेंस और प्रक्रियाएं पूरी कर उन्होंने अपने ब्रांड को स्थापित किया। अब वह लड्डू के साथ-साथ अचार, चटनी और मसाले भी तैयार कर रही हैं।
देश से विदेश तक पहुंचा स्वाद
घर की छोटी सी रसोई से शुरू हुआ यह काम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है। उनके बनाए उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा तक भेजे जा रहे हैं। शुद्ध देसी घी और पारंपरिक स्वाद के कारण ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
30 प्रकार के हेल्दी लड्डू
अनु करीब 30 प्रकार के लड्डू तैयार करती हैं, जो पोषण से भरपूर होते हैं। इनमें कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन्स मौजूद होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। इन लड्डुओं को 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके अलावा वह अचार और मोरिंगा पाउडर से बने उत्पाद भी तैयार कर रही हैं।
परिवार का सहारा बनी अनु
अनु के पति जितेंद्र बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब घर में खाने तक की समस्या थी, लेकिन आज अनु ने अपने दम पर न सिर्फ परिवार की आर्थिक स्थिति संभाली, बल्कि पूरे परिवार को मजबूती दी।
हौसले को सलाम
अनु जून ने यह साबित कर दिया कि सफलता के लिए बड़ी पूंजी नहीं, बल्कि मजबूत इरादे और मेहनत जरूरी होती है। उनका “शुद्ध रसोई” आज सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि भरोसे और परंपरा का प्रतीक बन चुका है।