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The Haryana Story | प्रकृति प्रेम की अलौकिक मिसाल: पानीपत की सड़कों पर बिखरी गुलमोहर की लाली, कंचन सागर की दशकों पुरानी मुहिम लाई रंग

प्रकृति प्रेम की अलौकिक मिसाल: पानीपत की सड़कों पर बिखरी गुलमोहर की लाली, कंचन सागर की दशकों पुरानी मुहिम लाई रंग

शहरीकरण के बीच बची प्रकृति की अनमोल धरोहर, जिसको बरसों बच्चों की तरह सींचा, 1987 से शुरू हुआ सफर,39 वर्षों बाद गुलमोहर की अद्भुत छटा देख कंचन सागर की आंखें हुईं नम

1987 से इस हरी-भरी मुहिम का हिस्सा हूँ मैं,

प्रकृति की रक्षा में समर्पित हर पल, एक नई मिसाल हूँ मैं.... 

प्रकृति और इंसान का रिश्ता कितना गहरा हो सकता है, इसकी एक जीती-जागती और भावुक कर देने वाली मिसाल पानीपत के मॉडल टाउन में देखने को मिल रही है। दशकों पहले रोपे गए नन्हें पौधे आज विशाल दरख्त बनकर न सिर्फ पर्यावरण को जीवन दे रहे हैं, बल्कि पूरे इलाके को अपनी स्वर्णिम आभा से सराबोर कर रहे हैं। पानीपत की जानी-मानी समाजसेवी कंचन सागर द्वारा वर्षों पहले लगाए गए गुलमोहर के पेड़ आज पूरी तरह से बड़े दरख़्त हो चुके हैं, जिनकी मनमोहक सुंदरता देखकर खुद कंचन सागर भावुक हो उठती है।

प्रकृति का अनमोल उपहार : आँखों में आए खुशी के आँसू

समाजसेविका कंचन सागर ने प्रकृति के इस अनमोल उपहार के प्रति अपने गहरे प्रेम और संवेदनाओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस मौसम में जब गुलमोहर के पेड़ लाल और नारंगी रंग के फूलों से लद जाते हैं, तो वह दृश्य अलौकिक होता है। कंचन सागर के अनुसार, "गुलमोहर की यह अद्भुत खूबसूरती सीधे दिल को छू लेती है। जब भी मैं इन रास्तों से गुजरती हूँ और अपने हाथों से लगाए इन पेड़ों को फूलों से लदा देखती हूँ, तो मन में गहरा सुकून और एक अजीब सी भावुकता उमड़ पड़ती है। यह दृश्य आँखों में खुशी के आँसू ले आता है।" उन्होंने इसे जीवन का सबसे अनमोल और सुकून भरा अनुभव बताया।

शहरीकरण की भेंट चढ़े कई पेड़, झलका दर्द

जहाँ एक ओर इन पेड़ों को देखकर कंचन सागर का मन बल्लियों उछल पड़ता है, वहीं शहरीकरण की अंधी दौड़ को लेकर उनके चेहरे पर चिंता और दर्द की लकीरें भी साफ नजर आती हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि विकास और शहरीकरण के नाम पर इनमें से कई हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया है। सड़कों को चौड़ा करने और कंक्रीट के जंगल बनाने की होड़ में उन पेड़ों की बलि दे दी गई, जिन्हें बरसों तक बच्चों की तरह सींचा गया था। "पेड़ सिर्फ लकड़ी का ढांचा नहीं होते, वे सांसें देते हैं और हमारी यादों का हिस्सा होते हैं। शहरीकरण के नाम पर इनका कटना बेहद पीड़ादायक है।"

आने वाली पीढ़ी के लिए संदेश

कंचन सागर ने इस मौके पर शहरवासियों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर हों। उन्होंने कहा कि आज हम जो पौधे लगाएंगे, वही कल हमारी आने वाली पीढ़ियों को छाया, शुद्ध हवा और ऐसा ही मनमोहक वातावरण देंगे। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर किया गया विकास विनाश की ओर ले जाता है। “चार दशकों से सींच रही हूँ इस धरा को अपने विश्वास से,आज विश्व पर्यावरण दिवस पर, यही दुआ है कि ये धरती महके हर साँस से।”

जापान के टोक्यो से निकलने वाली अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रिका 'हिंदी की गूंज' की पानीपत प्रभारी

बता दें कि पानीपत की प्रसिद्ध समाजसेविका और कवयित्री डॉ. कंचन सागर नारी कल्याण समिति की अध्यक्ष और इनरव्हील क्लब पानीपत मिडटाउन की 'चार्टर प्रेसिडेंट' के पद पर कार्यरत हैं। नारी कल्याण समिति के बैनर तले वे महिलाओं के कल्याण, स्वास्थ्य शिविरों और सामाजिक उत्थान के लिए लगातार काम करती हैं। इनरव्हील क्लब पानीपत मिडटाउन के माध्यम से भी उन्होंने सामाजिक सेवा के क्षेत्र में 38 से अधिक वर्षों का लंबा योगदान दिया है। इसके साथ ही जापान के टोक्यो से डॉ. रमा शर्मा के संपादन में निकलने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय हिंदी पत्रिका 'हिंदी की गूंज' की वे पानीपत प्रभारी हैं। वे अपनी कविताओं और कहानियों के जरिए विदेशों में भी हिंदी को लोकप्रिय बना रही हैं। 

डॉ. कंचन सागर का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका

हाल ही में डॉ. कंचन सागर को विश्व प्रसिद्ध पुस्तक द वूमन एंटरप्रेन्योर में स्थान मिला है। इस पुस्तक में भारत की चुनिंदा सफल महिलाओं जैसे नीता अंबानी, एकता कपूर आदि के साथ कंचन सागर के निस्वार्थ सेवा भाव को 31वें स्थान पर शामिल किया गया है। समाजसेवा और 'मां जैसा कोई नहीं' नामक अंतरराष्ट्रीय पुस्तक परियोजना में मार्गदर्शन के लिए उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है। हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उन्हें 'हिंदी गौरव सम्मान' से भी नवाजा जा चुका है।

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