हरियाणा के हांसी शहर और उसके ग्रामीण इलाकों में गहराते पेयजल संकट के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। एक तरफ जहाँ गांव चानौत के ग्रामीण पिछले काफी समय से पेयजल पाइपलाइन में टी-कनेक्शन दिए जाने की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं, वहीं दूसरी तरफ हांसी शहर को बरवाला ब्रांच से नहरी पानी उपलब्ध करवाने के लिए तैयार की जा रही करीब 61.44 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी 'अमृत-2' परियोजना पर भी फिलहाल पूरी तरह ब्रेक लग गया है। यह काम राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से एनओसी न मिलने के कारण अधर में लटक गया है। हांसी के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान Public Health Engineering Department के XEN संजीव त्यागी ने इस पूरे मामले का खुलासा किया।
परियोजना का उद्देश्य
बरवाला ब्रांच (राजली हेड) से हांसी शहर के वाटर वर्क्स तक पाइपलाइन बिछाकर भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। विभाग इस बेहद जरूरी योजना का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा कर चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने विभाग को आधिकारिक पत्र भेजकर राष्ट्रीय राजमार्ग-148बी (NH-148B) के चौड़ीकरण कार्य का हवाला दिया है।
अंतिम मंजूरी तक रोक, चानौत गांव का 'जल-संग्राम' और बढ़ा तनाव
NHAI ने साफ निर्देश दिए हैं कि जब तक सड़क की अंतिम चौड़ाई, राइट ऑफ वे (ROW) और तकनीकी डिजाइन को अंतिम रूप देकर मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक पाइपलाइन बिछाने का काम तुरंत रोका जाए। इस परियोजना के रुकने से क्षेत्र में पानी को लेकर चल रहा विवाद और पेचीदा हो गया है। बरवाला के राजली हेड से हांसी शहर तक आ रही करीब 27 से 30 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन के रास्ते में पड़ने वाले चानौत (चैनत) गांव के ग्रामीण पिछले 50 दिनों से धरने पर बैठे हैं।
ग्रामीणों की मांग
भूजल खारा और दूषित होने के कारण गांव के करीब 8,000 लोग साफ पानी के संकट से जूझ रहे हैं। उनकी मांग है कि इस बड़ी पाइपलाइन से उनके गांव के लिए भी एक स्थायी टी-कनेक्शन दिया जाए। पिछले दिनों ग्रामीणों ने खुद ही पाइपलाइन में एक 6 इंच का टी-कनेक्शन जोड़ दिया था, जिसे 22 जून की रात को प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ उखाड़ दिया। इसके बाद पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज हुआ। प्रशासन ने इस मामले में ग्रामीणों पर एफआईआर भी दर्ज की है।
आंदोलन हुआ तेज
ग्रामीण अब "पानी नहीं, तो वोट नहीं" के नारे के साथ डटे हुए हैं और हाल ही में उन्होंने जंजीरों में बंधकर मार्च निकाला तथा समाधान न होने पर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु तक की गुहार लगाने की बात कही है। इस जल आंदोलन को अब आसपास के 24 गांवों और खाप पंचायतों का भी समर्थन मिल चुका है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य हांसी शहर की प्यास बुझाना था। परंतु, एक ओर ग्रामीणों का उग्र विरोध और दूसरी ओर NHAI की तकनीकी आपत्तियों के बाद काम पूरी तरह रुक जाने से अब हांसी शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों की जनता को स्वच्छ पेयजल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। विभाग अब NHAI के साथ मिलकर तकनीकी डिजाइन को मंजूरी दिलाने के प्रयासों में जुट गया है ताकि इस गतिरोध को खत्म कर काम दोबारा शुरू कराया जा सके।
एनओसी नहीं मिली थी तो परियोजना का कार्य कैसे शुरू कर दिया गया?
प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब NHAI की एनओसी नहीं मिली थी तो परियोजना का कार्य कैसे शुरू कर दिया गया। इस पर XEN संजीव त्यागी ने बताया कि कई बार जनहित की बड़ी सरकारी परियोजनाओं में विभिन्न विभागों की आंतरिक NOC प्रक्रिया के साथ-साथ चलती रहती है और बाद में भी प्राप्त हो जाती है। हांसी शहर में पेयजल की भारी किल्लत और बढ़ती जरूरत को देखते हुए विभाग ने संभावित स्वीकृति के भरोसे कार्य पहले ही शुरू कर दिया था ताकि परियोजना में देरी न हो। विभाग ने NOC के लिए आवेदन किया हुआ था, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग-148बी (NH-148B) के चौड़ीकरण कार्य का हवाला देते हुए NHAI ने 24 जून 2026 को पत्र भेजकर NOC देने से अचानक इनकार कर दिया।
काम पर लगी अस्थायी रोक
करीब 60% कार्य पूरा होने के बाद, अब NHAI से अंतिम मंजूरी न मिलने के कारण इस परियोजना को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस पाइपलाइन को लेकर चानौत (चैनत) गांव के ग्रामीण पिछले 50 दिनों से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। वे इस मुख्य पाइपलाइन से अपने गांव के लिए एक अवैध 'टी-कनेक्शन' (कट) की मांग कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने यह कहकर खारिज कर दिया कि यह योजना केवल हांसी शहर के लिए है। इस मुद्दे पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने जैसी हिंसक झड़पें भी हुई थीं। हालांकि, XEN ने साफ किया कि काम को चानौत गांव के विवाद के कारण नहीं, बल्कि सिर्फ NHAI की NOC अटकने की वजह से रोका गया है।
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