जापान में आयोजित एशियन गेम्स में हरियाणा के भिवानी जिले के गांव देवसर निवासी जैवलिन थ्रोअर यशवीर सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में रजत पदक डाला। यशवीर ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो स्पर्धा के फाइनल में अपने छठे और अंतिम प्रयास में 85.72 मीटर भाला फेंककर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल हासिल किया। यशवीर की इस उपलब्धि से देवसर स्थित उनके परिवार में खुशी का माहौल है। घर पर मिठाइयां बांटी गईं और खुशी में आतिशबाजी भी की गई। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें यशवीर से पदक की उम्मीद थी और अब उसके सिल्वर जीतने से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है।
88 मीटर से ज्यादा थ्रो की थी उम्मीद
यशवीर के चाचा फतेह तंवर ने बताया कि परिवार को उम्मीद थी कि यशवीर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतेगा। उनका अनुमान था कि वह 88 मीटर से ज्यादा का थ्रो कर सकता है। हालांकि मुकाबले के दौरान मौसम की परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। इसके बावजूद यशवीर ने अपने छठे प्रयास में 85.72 मीटर का थ्रो कर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। एशियन गेम्स के इस फाइनल में श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत के ही रोहित यादव ने 84.35 मीटर के प्रदर्शन के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह पुरुष जैवलिन थ्रो में भारत ने दो पदक जीते।
पिता से मिली जैवलिन की प्रेरणा
परिवार के अनुसार यशवीर ने वर्ष 2017 में अपने पिता राय सिंह से प्रेरणा लेकर जैवलिन थ्रो की शुरुआत की थी। राय सिंह स्वयं जैवलिन थ्रो के खिलाड़ी रहे हैं और नेशनल स्तर पर कई पदक जीत चुके हैं। वहीं यशवीर के दादा भी 400 मीटर हर्डल के खिलाड़ी रहे हैं। ऐसे में खेल का माहौल यशवीर को परिवार से ही मिला। परिवार के मुताबिक यशवीर ने खेल की शुरुआत में बास्केटबॉल भी खेला था, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपना मुख्य खेल बना लिया। करीब नौ साल के खेल सफर के बाद अब उन्होंने एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर रजत पदक जीतकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है।
दादी बोलीं- पोते ने मेरी उम्र 2 साल बढ़ा दी
यशवीर की दादी रत्नी देवी अपने पोते की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पोता मेडल लेकर आया है, इससे उन्हें बहुत खुशी हुई है। दादी ने बताया कि वह घर में भैंस रखती थीं और यशवीर को घर का दूध खिलाती-पिलाती थीं। रत्नी देवी ने कहा कि पोता-पोती तो हर किसी को प्यारे होते हैं, लेकिन यशवीर ने इतना बड़ा नाम कमाया है कि उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने कहा कि पोते ने उनका नाम रोशन किया है और ऐसा लगता है कि उसने उनकी उम्र ही दो साल बढ़ा दी है। दादी ने बताया कि यशवीर को खीर और चूरमा पसंद है। उन्होंने कहा कि जब वह मेडल जीतकर घर लौटेगा तो उसे अपने हाथ से खीर-चूरमा खिलाएंगी।
घर लौटने पर होगा जोरदार स्वागत
चाचा फतेह सिंह ने बताया कि यशवीर के पदक जीतने के बाद परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। परिवार की ओर से खुशी में आतिशबाजी की गई और मिठाई बांटी गई। उन्होंने कहा कि यशवीर के वापस घर लौटने पर उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा। यशवीर सिंह की इस उपलब्धि ने एक बार फिर यह दिखाया है कि खेल प्रतिभा को परिवार का सहयोग और लगातार मेहनत मिले तो छोटे गांवों से निकले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
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