जब दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो.. साथ ही कठिन मेहनत और लगन हो तो इंसान अपनी मंजिल जरूर हासिल करता है। उसे विघ्न, परिस्थितियां, बाधाएं हरा नहीं सकती। चाहे मंजिल तक पहुंचने में कितनी ही कठिनाई क्यों ना आए, लेकिन उन सब दिक्कतों को झेल कर इंसान अपने लक्ष्य को पा लेता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पानीपत रिफाइनरी के कर्मचारी मंटू कुमार ने। युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में पानीपत रिफाइनरी के कर्मचारी मंटू कुमार ने एकल और युगल वर्ग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर पानीपत रिफाइनरी के साथ-साथ देश और प्रदेश का नाम भी पूरे विश्व में रोशन किया है।
पोलियो की वजह से पैर में दिक्कत
मंटू के कांस्य पदक जीतने की खबर मिलते ही रिफाइनरी टाउनशिप और उनके बिहार स्थित पैतृक गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बधाई देने वालों का तांता लग गया। मंटू कुमार ने बताया कि युगांडा की राजधानी कंपाला में 1 जुलाई से 6 जुलाई तक युगांडा अंतर्राष्ट्रीय पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता 2025 का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से विभिन्न वर्गों में 23 प्रतिभागियों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनको बैडमिंटन खेलना बहुत अच्छा लगता था। परंतु पांव में पोलियो होने के कारण उठने-बैठने, चलने-फिरने और खेलने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
पदक से ज्यादा ख़ुशी राष्ट्रगान की धुन से हुई
दिव्यांगता के कारण मुझे बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। परंतु मेरे पिता रामाश्रय राम और माता लखिया देवी के आशीर्वाद, प्रेरणा और सहयोग के कारण आज मुझे यह मुकाम हासिल हुआ है। पैर से दिव्यांग होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैडमिंटन में एकल और युगल (डबल्स) वर्ग में कांस्य पदक प्राप्त कर मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उससे भी ज्यादा खुशी तब हुई जब मुझे मेडल दिया गया और राष्ट्रीय ध्वज लहराते हुए राष्ट्रगान की धुन सुनाई दी।
दिव्यांग होना कोई अभिशाप नहीं
पानीपत रिफाइनरी कर्मचारी यूनियन के पूर्व प्रधान संपूर्ण सिंह, यूनियन नेता प्रदीप शर्मा, विजय बूमरा आदि सहित काफी कर्मचारियों मंटू कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया है दिव्यांग होना कोई अभिशाप नहीं है। अगर मन में इच्छाशक्ति हो तो चाहे कितनी भी बाधाएं आएं आपका जुनून आपके सपने को पूरा करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि मंटू कुमार दिव्यांग नहीं बल्कि हर किसी के लिए एक प्रेरणा है। हमें दिव्यांगता को अभिशाप नहीं समझना चाहिए अगर इरादों में दम है तो बड़ी से बड़ी दिव्यांगता आपको आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।
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