पानीपत जिले में यमुना उफान पर होने के कारण ड्रेन नंबर दो टूट गई और कटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे नहरी विभाग में हड़कंप मच गया। वही जेई मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन व मजदूरों की सहायता लेकर मिट्टी से भरे कट्टों से रोक दिया गया वहीं सोमवार शाम के समय पुराने हथवाला बांध के नजदीक तेजी के साथ पानी का प्रवाह होने के चलते झोपड़ी में डेरा जमाए बैठे विभाग के जेई ने मौके पर पहुंचकर चार साधुओं को तुरंत झोपड़ी खाली करने को कहा जिस पर साधु आनन फानन में झोपड़ी खाली करके सुरक्षित स्थान पर चले गए कुछ ही देर बाद यमुना का पानी तेजी के साथ गहरे गड्ढे में खड़ा होकर बांध के नजदीक पहुंच गया फिलहाल हथवाला बांध से लेकर गांव बिलासपुर बांध तक करीब 5000 मिट्टी से भरे कट्टे रखे हुए हैं।
हालात को देखकर कुछ किसानों की आंखों में आंसू छलक उठे
गांव राकसेडा रकबे में यमुना का पानी तेजी के साथ खड़ी धान की फसल में घुस आया और सिभलगढ रोड पर पानी खड़ा हो गया, हालांकि यहां पर सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल जलमग्न व डूब गई है जिसको देखने के लिए दो गांव के किसानों के अलावा ग्रामीण भारी संख्या में में मौके पर पहुंचे जिनमें महिलाएं भी शामिल थी हालात को देखकर कुछ किसानों की आंखों में आंसू छलक उठे। सरपंच के मुताबिक इसी रकबे में 200 एकड़ से अधिक फसल बर्बाद हो गई जबकि खेतों में ट्यूबवेल यमुना के पानी में समा गए। वहीं हथवाला घाट पर बनाई गई 10 से अधिक ठोकर के अलावा बिलासपुर बांध के नजदीक पुरानी ठोकरें पानी में समा गई।
ढाई सौ लोगों को सरकारी स्कूल में रहने व खाने पीने की व्यवस्था की
उधर राकसेडा ग्राम पंचायत के अधीन डेरा घोड़ीवाला में रात भर ग्रामीण पहरा देते रहे। स्थिति को लेकर सरपंच ने करीब 50 मकानों में रह रहे 200 ढाई सौ लोगों को सरकारी स्कूल में रहने व खाने पीने की व्यवस्था की है। यमुना उफान के चलते अधिकारियों व कर्मचारियों की नींद हराम हो गई है। रात भर नहरी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी यमुना के आसपास डेरा डाले रहे। भूमि कटाव का कहर जारी है जिसका पानी कम होने पर आकलन लगाया कि फसल को कितना नुकसान हुआ है लेकिन किसानों ने उफनती यमुना को लेकर फसलों को भारी नुकसान होने की बात कही है जिनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी है। फिलहाल गांव सिभलगढ से कुछ भी दूरी पर खतरे के निशान पर यमुना का पानी खड़ा है।
200 एकड़ के आसपास फसल बर्बाद हो गई
उधर किसानों ने नहरी विभाग के अलावा शासन व प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राकसेडा रकबे में स्थिति से निपटने के लिए यहां पर कोई व्यवस्था नहीं की गई और न हीं अभी तक किसी अधिकारी ने दौरा करना उचित नहीं समझा। गांव राकसेडा के सरपंच रामधन सैनी ने बताया कि यमुना उफान पर होने के कारण 200 एकड़ के आसपास फसल बर्बाद हो गई, आज यमुना में 2 लाख से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि गांव सिभलगढ व डेरा घोडी वाला खतरे के निशान पर हैं जिसको देखते हुए घोडीवाला में 50 मकानों में रह रहे 200 या ढाई लोगों को सरकारी स्कूल में रहने व खाने-पीने की व्यवस्था कर दी गई है इसके साथ ही यमुना के आसपास नजर रखने के लिए 10 युवकों की ड्यूटी लगाई गई है।
सरपंच ने बताया कि 1978 में बांध टूट गया था, आज तक सरकार व प्रशासन ने कोई उचित कदम नहीं उठाया गया
मुनादी कराई जा रही है कोई भी यमुना की तरफ न जाए। उन्होंने बताया कि आज सुबह के समय चार-पांच गीदड़ गांव की तरफ आने लगे तो इसी दौरान वह कहीं सुरक्षित स्थान पर निकल गए। सरपंच ने बताया कि 1978 में बांध टूट गया था लेकिन आज तक सरकार व प्रशासन की ओर से कोई उचित कदम नहीं उठाया गया। उधर नहरी विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश सैनी ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है अधिकारियों व कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि ड्रेन के टूट जाने से कंट्रोल कर लिया गया।